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सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों का बयान, कांग्रेस ने लोकतंत्र को बताया खतरे में

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशें द्वारा खुलेआम शीर्ष न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं बताये जाने के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार (12 जनवरी) को कहा कि ‘लोकतंत्र खतरे में है.’ कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया, ‘‘हम यह सुनकर बहुत चिंतित हैं कि उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों ने शीर्ष न्यायालय के कामकाज पर चिंता जतायी है. लोकतंत्र खतरे में है.’’ एक अप्रत्याशित कदम में उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन बुलवाया और कि उच्चतम न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं है तथा कई ऐसी चीजें हुईं जिनकी जरूरत नहीं थी. चारों न्यायाधीशों ने कहा कि जब तक संस्थानों ने कहा कि जब तक संस्थानों का संरक्षण नहीं होता, देश में लोकतंत्र नहीं चल पाएगा.

सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने अप्रत्याशित संवाददाता सम्मेलन में जो मुद्दे उठाए हैं, वे न्यायपालिका का ‘आंतरिक’ मामला हैं. सूत्रों ने इशारा किया कि इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप करने की संभावना बहुत कम है. सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सरकार कुछ नहीं कह सकती और वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती. उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए क्योंकि लोगों का न्यायपालिका में भरोसा दांव पर है.

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न्यायालय ने चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘सही नहीं हैं’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘अपेक्षा से कहीं कम’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘… कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’

संवादाता सम्मेलन में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के अलावा न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ मौजूद थे. कानून मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में बातचीत के लिए अभी तक मुलाकात नहीं की है.

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