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सरकार बैंकों को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है

नई दिल्ली : सरकार ने सुधार योजना के तहत देश के बड़े 12 बैंकों को 52,311 करोड़ रुपये की पूंजी देने की योजना को मंजूरी दी है सरकार बैंकों को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. बावजूद इसके सार्वजनिक बैंकों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है. बैंकों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा एनपीए यानी कर्ज के रूप में डूब जाता है.

अच्छे प्रदर्शन के लिए पुरस्कार
उन्होंने कहा, जहां तक पूंजी की दिक्कत थी तो उसे सरकार ने पर्याप्त रूप से उपलब्ध करा दी है. अब बैंकों को एनपीए के मोर्चे पर अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी. यदि बैंकों का प्रदर्शन बेहतर रहा तो उन्हें पुरस्कृत भी किया जाएगा.

सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, देना बैंक, बैंक आफ महाराष्ट्र, यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया, कार्पोरेशन बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं. इसके अलावा इनमें आईडीबीआई बैंक, बैंक आफ इंडिया और यूको बैंक भी शामिल हैं.

शीर्ष प्रबंधन पर नजर
सरकार अब बैंकों के कामकाज की समीक्षा करेगी, ताकि कमियों में सुधार किया जा सके. वित्त मंत्रालय सरकारी बैंकों के कामकाज में सुधार के प्रयासों के तहत रिजर्व बैंक की तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई योजना (पीसीए) के आधार पर सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों के प्रदर्शन समीक्षा की शीघ्र ही शुरुआत करने वाला है. रिजर्व बैंक ऋण वसूली और खुद की आधार पूंजी जैसे पैमानों पर 12 सार्वजनिक बैंकों पर नजर रखे हुए है. सूत्रों ने बताया कि सभी सार्वजनिक बैंकों के शीर्ष प्रबंधन की प्रदर्शन समीक्षा शीघ्र शुरू की जाएगी.

 

सुधार के लिए बैंकों को 52,311 करोड़
तत्पर और उत्तरदायी सार्वजनिक बैंकों के लिए सुधार योजना के तहत सरकार ने इन 12 बैंकों को हाल में 52,311 करोड़ रुपये की पूंजी देने की प्रतिबद्धता जताई. इनमें सबसे अधिक 10,610 करोड़ रुपये आईडीबीआई बैंक को, 9,232 करोड़ रुपये बैंक आफ इंडिया को और 6,507 करोड़ रुपये यूको बैंक को दिए जा रहे हैं.

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