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LoC पर संघर्ष विराम उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान ने भारतीय दूत को किया तलब

इस्लामाबाद: भारतीय सैनिकों द्वारा कथित तौर पर ‘बिना किसी उकसावे’ के की गई गोलीबारी को लेकर भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त को शुक्रवार (12 जनवरी) को तलब किया. इस गोलीबारी में एक वृद्ध महिला की मौत हो गई थी. विदेश कार्यालय ने दावा किया कि भारतीय सैनिकों द्वारा कोट कोटेरा सेक्टर में किये गए संघर्ष विराम उल्लंघन में 65 वर्षीय वृद्ध महिला की गुरुवार (11 जनवरी) को पीर खाना गांव में मौत हो गई थी. वक्तव्य में बताया गया कि महानिदेशक (दक्षिण एशिया एवं दक्षेस) मोहम्मद फैसल ने कार्यवाहक भारतीय उप उच्चायुक्त को तलब किया और ‘‘भारतीय सैनिकों द्वारा 11 जनवरी को बिना किसी उकसावे के की गई गोलीबारी की निंदा की.’’

उन्होंने कहा, ‘‘संयम बरतने का आह्वान किये जाने के बावजूद भारत ने संघर्ष विराम का उल्लंघन जारी रखा.’’ फैसल ने दावा किया, ‘‘भारत की ओर से अप्रत्याशित संघर्ष विराम उल्लंघन में वृद्धि 2017 से जारी है जब भारतीय सैनिकों ने 1900 से अधिक बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया.’’ उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से संघर्ष विराम उल्लंघन ‘‘क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिये खतरा है और गलत सामरिक अनुमान की ओर ले जा सकता है.’’

वहीं दूसरी ओर जम्मू कश्मीर सरकार ने शुक्रवार (12 जनवरी) को कहा कि वर्ष 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में फैली आठ महीने की अशांति के दौरान 51 लोगों की जान गई और नौ हजार से अधिक घायल हुए। इसमें पैलेट से घायल छह हजार से अधिक लोग भी शामिल हैं।

राज्य विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस के एक विधायक के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को कहा कि अशांति में आठ जुलाई 2016 से 27 फरवरी 2017 तक कश्मीर संभाग में 51 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि इस अवधि में गोलियों, पैलेट, पावा शैल और अन्य की गोलीबारी में 9042 लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि इनमें से 6221 लोग पैलेट से, 368 गोली, चार पावा शैल और 2449 अन्य से घायल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 782 लोगों को आंख में चोट लगी जिसमें से 510 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पैलेट से घायल 5197 लोगों का जिला अस्पतालों में इलाज चल रहा है और बाकी को सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में भेजा गया।
महबूबा ने कहा कि सबसे ज्यादा 16 मौतें अनंतनाग जिले में जबकि कुलगाम जिले में 13, पुलवामा में सात और कुपवाड़ा में पांच मौतें हुईं।

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