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झोलाछाप डॉक्टर ने एक ही सूई का इस्तेमाल कर 21 लोगों को किया HIV पीड़ित

उन्नाव (उप्र): उन्नाव जिले के बांगरमऊ क्षेत्र में एचआईवी के 21 नये मरीज मिले हैं. इस मामले में एक झोलाछाप डाक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसपी चौधरी ने यहां बताया कि जिले में लाइलाज बीमारी एचआईवी के बढ़ते मामलों को देखकर स्वास्थ्य विभाग ने दो सदस्यीय समिति गठित की थी. इस समिति को बांगरमऊ ब्लाक के प्रेमगंज, चकमीरपुर सहित कई बस्तियों में जाकर एचआईवी फैलने के कारणों की जांच के लिये भेजा गया था.

उन्होंने बताया कि समिति की रिपोर्ट पर गत 24, 25 और 27 जनवरी को बांगरमऊ ब्लाक के अंतर्गत तीन स्थानों पर जांच शिविर लगाकर 566 लोगों की जांच करायी. उनमें से 21 मरीज एचआईवी संक्रमित पाये गये. चौधरी ने बताया कि इन मरीजों को कानपुर स्थित एआरटी सेंटर भेज दिया गया.

वहीं, कमेटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि पडोस के गांव का रहने वाला झोला छाप डाक्टर राजेन्द्र कुमार सस्ते इलाज के नाम पर एक ही इंजेक्शन लगा रहा था. इसी कारण एचआईवी के मरीजो की संख्या में खासा इजाफा हुआ है. उन्होंने बताया कि झोलाछाप डाक्टर राजेन्द्र कुमार पर बांगरमऊ कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया है.

HIV या AIDS पीड़ितों के लिए कोई बीमा पॉलिसी है?
पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की कई बीमा कंपनियों से यह पूछा था कि क्या एचआईवी या एड्स पीड़ितों के लिए कोई बीमा पॉलिसी है. अदालत ने यह प्रश्न एक याचिका की सुनवाई के दौरान किया था. जिसमें एचआईवी संक्रमित और एड्स पीड़ितों को जीवन एंव स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में सभी लाभों के साथ शामिल किए जाने की मांग की गई थी.  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने पीएसयू बीमा कंपनियों को तत्काल कदम उठाने और बीमा नियामक एंव विकास प्राधिकार (आईआरडीए) के दिशानिर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे.

पीठ ने कहा था कि एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों को बीमा सेवा मुहैया कराने के मामले में अपने ( बीमा कंपनियां) रुख से इस अदालत को अवगत कराएं. साथ ही पीठ ने उन्हें एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को अगले वर्ष 22 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया. केन्द्र सरकार के वकील ने एचआईवी एंड एड्स अधिनियम की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया जो कि लोगों के बीच समानता की अनिवार्यता और एचआईवी या एड्स पीड़ितों के बीच किसी भी तरह के भेदभाव को वर्जित करती थी.

सुनवाई के दौरान राज्य की बीमा कंपनियों के वकील ने कहा था कि मामला विचाराधीन है और उन्हें कुछ वक्त चाहिए लेकिन वह आईआरडीए के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए थी. इससे पहले अदालत ने याचिका पर स्वास्थ्य मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और आईआरडीए को नोटिस भेज कर जवाब मांगा था. याचिका में एचआईवी और एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया गया था.

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