अरुण जेटली के बजट पेश करने से ठीक पहले ममता बनर्जी ने की ये ‘भविष्यवाणी’

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कोलकाता: वित्त मंत्री अरुण जेटली आज (1 फरवरी) को आम बजट 2018 पेश करेंगे. यह मौजूदा मोदी सरकार का आखिरी पूर्णकालिक बजट है, जिसके चलते जनता काफी उम्मीदें लगाए बैठी है. केंद्रीय बजट 2018-19 को पेश किए जाने से एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा. ममता ने कहा कि बजट अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाया गया है. तृणमूल कांग्रेस की कोर समिति की बैठक के बाद उन्होंने कहा, “केंद्रीय बजट कल (गुरुवार) पेश किया जाएगा. केंद्र सरकार इस साल चुनावी बजट लेकर आ रही है. सबको पता है कि पिछले चार साल से सरकार कैसे चल रही है और वर्तमान में क्या हालात हैं. लेकिन इस साल वे एक चुनावी बजट पेश करने जा रहे हैं.”

‘हम कभी जनता विरोधी कार्यक्रम नहीं लाते’
उन्होंने दावा किया, “हम चुनाव को देखकर बजट पेश नहीं करते. हमारा बजट उन्नतिशील होता है. यह हमेशा जनता के लिए होता है. हमारी सरकार के साथ क्या होगा यह जरूरी नहीं है, हम कभी भी जनता विरोधी कार्यक्रम नहीं लाते हैं.”

बंगाल में जल्द होने वाले पंचायत चुनाव के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल अगस्त तक सभी चुनावों को पूरा कर लिया जाएगा और उन्होंने पार्टी के नेताओं से आग्रह किया कि वे सभी लंबित कार्यों को समय से निपटा दें.

तृणमूल प्रमुख ने कहा, “पंचायत चुनाव अगले तीन से चार महीने में होंगे, क्योंकि वर्तमान पंचायत का कार्यकाल इस साल अगस्त में समाप्त होने जा रहा है.”

पहली बार आम बजट के साथ पेश होगा रेल बजट
पहली बार आम बजट के साथ रेल बजट पेश होगा. साल 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार की ओर से गुरुवार को पेश किए जाने वाले अंतिम पूर्ण बजट में रेलवे के लिए सुरक्षा चिंताओं के समाधान, यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी और अवसंरचना में बड़ा निवेश पर जोर दिए जाने की उम्मीद है. बजट में रेल किराए में बढ़ोतरी या नई ट्रेनों की घोषणा की उम्मीद नहीं है. चालू वित्त वर्ष के 96 फीसदी के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में 95 फीसदी परिचालन अनुपात (ओआर) रहने की उम्मीद है.

90 रुपए खर्च कर एक रुपए कमाती है रेलवे
रेलवे की वित्तीय हालत का पता उसके ओआर से तय होता है, इससे पता लगता है कि रेलवे एक रुपये की कमाई करने के लिए कितना खर्च करती है. अगर ओआर 90 फीसदी है तो इसका मतलब है कि रेलवे एक रुपये की कमाई करने के लिए 90 पैसा खर्च कर रही है.

आने वाले सालों में इलेक्ट्रिक इंजनों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रेलवे वाराणसी के डीजल लोकोमोटिव वर्क्‍स (डीएलडब्ल्यू) और पाटियाला के डीजल कंपोनेंट वर्क्‍स (डीसीडब्ल्यू) में इलेक्ट्रिक इंजनों के निर्माण का प्रावधान किया जा सकता है.

रेलवे की पुरानी पटरियों को बदलने पर होगा फोकस
रेलने ने सभी मार्गो का विद्युतीकरण करने का फैसला किया है और वह डीजल इंजनों को धीरे-धीरे बाहर कर रही है. इसलिए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक इंजनों की जरूरत है. बजट में रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए 95,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की उम्मीद है, जिसमें सिग्नलों का ऑटोमेशन तथा पुरानी पटरियों को बदलना भी शामिल है. मध्य वर्ग की बजट से करों का बोझ हल्का करने की अपेक्षाएं हैं. सरकार द्वारा राजकोषीय घाटे को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों को जारी रखने की उम्मीद है.

बजट में रेलवे के लिए योजनागत आवंटन को 1.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.46 लाख करोड़ रुपये करने की उम्मीद है. साथ ही सकल बजटीय समर्थन (जीबीएस) करीब 65,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में यह 55,000 करोड़ रुपये थी.

बाजार से पैसे कमाना चाहती है रेलवे
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कई बार कहा कि रेलवे को जीबीएस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए तथा अपने आंतरिक संसाधनों और बाजार से धन पैदा करना चाहिए. वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में सभी 11,000 ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान हो सकता है, जिसमें रेलवे के सभी 8,500 स्टेशन भी शामिल होंगे. बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए इस बजट में देश भर के सभी प्रमुख शहरी और उपशहरी स्टेशनों पर 3,000 एस्केलेटर और 1,000 लिफ्ट लगाने का प्रावधान भी किया जा सकता है.