‘भारत को घेरने के लिए ग्वादर बंदरगाह में चीन दिखा रहा दिलचस्पी’

0
20

वॉशिंगटन:  अमेरिकी थिंक टैंक समुदाय ने सांसदों से कहा है कि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीन की वाणिज्यिक और सैन्य दिलचस्पी है, साथ ही अमेरिका की राजनीति, असैन्य तथा सैन्य समेत सभी सेवाओं में भारत के साथ साझेदारी को मजबूत करने के लिए ट्रंप प्रशासन की प्रशंसा की. समुदाय के सदस्यों ने हाउस फॉरेन रिलेशन्स कमेटी को पाकिस्तान पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान सांसदों को बताया कि हाल में हुए बदलाव यह संकेत दे रहे हैं कि पाकिस्तानी नेतृत्व को यह अहसास होता जा रहा है कि चीन का निवेश उसके आर्थिक तथा रणनीतिक हितों के बारे में अधिक है.

द हेरिटेज फाउंडेशन 
द हेरिटेज फाउंडेशन में दक्षिण एशिया विषय पर रिसर्च फैलो जेफ स्मिथ ने कहा, ‘‘ एक दशक पहले की बात करें तो बड़ी संख्या में भारतीय रणनीतिकारों ने चिंता जताई थी और सार्वजनिक तौर पर यह शिकायत की थी कि चीन हिंद महासागर के किनारे-किनारे बंदरगाह सुविधाएं और साजो-सामान सुविधाएं विकसित कर सकता है लेकिन उस वक्त इन चिंताओं को खास महत्व नहीं दिया गया. ’’स्मिथ ने भारत के साथ साझेदारी को मजबूत करने के लिए ट्रंप प्रशासन की तारीफ की.

अमेरिका का पीएम मोदी के अच्छे संबंध है 
उन्होंने कहा कि अमेरिका का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक अनोखा नाता है और ट्रंप प्रशासन इसे आगे ले जाने के लिए आशावान है. उन्होंने कहा,‘‘ अमेरिका और भारत के बीच मजबूत साझेदारी हिंद महासागर में हमारे हितों की रक्षा करेगी. ’’ कांग्रेस सदस्य एन वागनर ने इस बात पर गौर किया कि पाकिस्तान ने चीन की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया जिसमें उसने ग्वादर मुक्त क्षेत्र के भीतर चीन की करंसी को स्वीकार्यता देने की मांग की थी.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे 
उन्होंने इस ओर ध्यान खींचा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए बीजिंग की वित्त पोषण की जो शर्तें हैं वह एक ऐसा मुद्दा बन गया है दोनों देशों के बीच सहयोग को रोकने का काम कर सकता है. कार्नेगी एनडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में दक्षिण एशिया कार्यक्रम के नॉन रेसिडेंट स्कॉलर अकील शाह ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों को यह अहसास है कि यह असल में पाकिस्तान के आर्थिक विकास के लिए नहीं बल्कि चीन के वाणिज्यिक आर्थिक हित के लिए है.