अमेरिका में जनगणना पर विवाद, पूछा जा रहा कुछ इस तरह सवाल

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वॉशिंगटन: अमेरिका वर्ष 2020 में अपनी अगली जनगणना की तैयारी कर रहा है लेकिन नागरिकता से जुड़े एक तीखे सवाल ने शुरुआत से पहले ही इसे विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है. दस वर्षों में होने वाली यह गणना जब शुरू होगी तो आंकड़े जुटाने वाले प्रतिभागियों से यह सवाल पूछेंगे कि क्या वह अमेरिका के नागरिक हैं. पर्यवेक्षक कहते हैं कि इससे कुछ जातीय अल्पसंख्यक समूह सहभागिता को लेकर हतोत्साहित होंगे.

ऐसे में आंकड़ों की सटीकता पर सवालिया निशान लग रहे हैं. एनएएलईओ एजुकेशन फंड के प्रमुख आर्टुरो वरगस ने कहा कि सितंबर में हुये सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि प्रतिभागियों में अमेरिकी सरकार को लेकर अभूतपूर्व खौफ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रवादी अप्रवासी एजेंडा के साथ सत्ता में आये थे और उन्होंने विदेशियों और प्रवासियों को आतंकवाद, अपराध और स्थानीय लोगों के लिये रोजगार न होने से जोड़ा था. पिछले महीने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान उन्होंने वैध आव्रजन को कम करने तथा प्रवर्तन पर बल देने की अपनी शपथ पर फिर से जोर दिया.

अमेरिका में 4% लोग गरीबी रेखा से नीचे
अमेरिका जनगणना रिपोर्ट के अनुसार  2015 में 4.3 करोड़ अमेरिकी नागरिकों ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन किया जो दुनिया की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले इस देश की आबादी का करीब 14% था. रिपोर्ट के अनुसार यह तब था जब पिछले साल अमेरिका में गरीबी का अनुपात 16 साल में सबसे तेजी से नीचे आया. वर्ष के दौरान गरीबी का अनुपात एक साल पहले से 1.2% नीचे था. अमेरिका जनगणना ब्यूरो के अनुसार 2015 में 13.5% अमेरिकी गरीबी रेखा से नीचे रह रहे थे. यह 2014 की तुलना में 1.2% कम थी. इसके अनुसार सालाना आधार पर गरीबी दर में इस तरह की कमी 1998 से 1999 के दौरान देखने को मिली थी.

H-1B वीजा के लिए प्रस्तावित अमेरिका बिल में कठिन शर्तें
इससे पहले 1 जनवरी को सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के संगठन नास्कॉम का मानना था कि  एच-1बी वीजा के लिए अमेरिका के प्रस्तावित विधेयक में काफी कठिन शर्तें हैं. नास्कॉम ने आगाह किया कि प्रस्तावित अमेरिकी विधेयक ‘अमेरिकी नौकरियों का संरक्षण और वृद्धि’ में भारतीय आईटी कंपनियों तथा एच-1बी वीजा का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों दोनों के लिए काफी दुष्कर शर्तें और गैर जरूरी प्रतिबद्धताओं को शामिल किया गया था. नास्कॉम ने कहा कि उसने वीजा से संबंधित मुद्दों को अमेरिका में सीनेटरों, सांसदों तथा प्रशासन के साथ उठाया था. प्रस्तावित कानून को लेकर आगामी सप्ताहों में भी वह लगातार वार्ता करेगा.