रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘मुझे रेल बजट पेश नहीं करने का नहीं है कोई मलाल’

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नई दिल्ली : रेल मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि उन्हें संसद में ‘रेलवे बजट पेश नहीं कर पाने का कोई मलाल’ नहीं है. बता दें  रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा मोदी सरकार ने 21 सितंबर, 2016 को खत्म कर दी थी.

‘यह एक राजनीतिक कवायद थी’
मीडिया से बात करते हुए गोयल ने कहा, ‘नहीं, नहीं, मुझे अलग से रेलवे बजट पेश करने का कोई मलाल नहीं है. वाकई, कई तरीकों से इन घोषणाओं ने रेलवे के लिए मुश्किल ही खड़ी की. यह राजनीतिक कवायद थी.’  जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कोई ऐसी ट्रेन चलाना चाहते हैं जिससे उनका नाम जुड़े तो उन्होंने कहा,’मुझे नामों के प्रति कोई आकर्षण नहीं है. दरअसल जो मैं चाहता हूं वह यात्रियों के लिए सुरक्षा एवं आराम सुनिश्चित करना है…और बुलेट ट्रेन आ रही है.’ उन्होंने कहा कि नए ट्रेनों और मार्गों के लिए उनके कार्यालय में नियमित रुप से अनुरोध आते हैं और वह उनकी व्यवहारपरकता पर विचार करते हैं.

बजट में रेलवे के लिए 1 .48 लाख करोड़ रुपये की घोषणा
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने वित्त वर्ष 2018- 19 के बजट में भारतीय रेल के लिए 1 .48 लाख करोड़ रूपये के पूंजीगत व्यय आवंटन की घोषणा की है. रेलवे के लिए यह अब तक की सर्वाधिक राशि है और यह पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है. जेटली ने संसद में बजट पेश करने के दौरान बताया कि रेलवे के लिए 1,48,528 करोड़ रूपया के आवंटन के साथ मुख्य ध्यान रेल नेटवर्क को मजबूत करना और रेलवे की क्षमता में विस्तार करना है. पिछले साल रेलवे के लिए 1. 31 लाख करोड़ रूपया आवंटित किया गया था.

वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत पर्याप्त कोष के आवंटन के साथ ‘सुरक्षा प्रथम’ की नीति की भी घोषणा की. साथ ही, मुंबई और बेंगलुरू के उपनगरीय यात्रियों का भी ध्यान रखा गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय रेल स्टेशन विकास कंपनी लिमिटेड 600 बड़े रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास करेगी और जिन स्टेशनों पर 25,000 से अधिक यात्रियों का आना जाना होता है वहां एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) लगाए जाएंगे. वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘सभी रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में क्रमिक रूप से वाई फाई और सीसीटीवी मुहैया किए जाएंगे ताकि यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके. ’’

‘यात्रियों की सुरक्षा के अलावा आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर
हालांकि, किसी बड़ी नई ट्रेन की घोषणा नहीं की गई और यात्रियों की सुरक्षा के अलावा आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर है. अलग से रेल बजट पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा पिछले साल समाप्त कर दी गई और इसे केंद्रीय बजट में मिला दिया गया. मंत्री ने लोकसभा में अपनी बजट घोषणा में कहा कि पटरियों के बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया गया है और 3600 किमी पटरियों का नवीकरण का भी लक्ष्य रक्षा गया है. साथ ही, अगले दो सालों में ब्रॉड गेज मार्गों पर 4,267 मानव रहित रेलवे क्रासिंग को भी समाप्त किया जाएगा.

अन्य बड़े कदमों में ‘फॉग सेफ’ (कोहरे से सुरक्षा) और ट्रेन सुरक्षा एवं चेतावनी प्रणाली शामिल हैं. जेटली ने रेलवे में 18,000 किमी लाइनों के दोहरीकरण के लक्ष्य का प्रस्ताव किया. साथ ही कहा कि रेलवे की क्षमताओं के दोहन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के मकसद से आमान परिवर्तन का काम जारी है. वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषताओं के साथ नयी ट्रेनें इंटरग्रेटेड कोच फैक्ट्री, पेरंबूर में डिजाइन की जा रही हैं. ऐसी पहली ट्रेन 2018- 19 में शुरू की जाएगी.

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में 12,000 डिब्बे, 5160 यात्री डिब्बे और करीब 700 रेल इंजन तैयार किए जाएंगे. पहली बार रेलवे मुंबई परिवहन प्रणाली का विस्तार करने जा रहा है. यह 11000 करोड़ रूपये से अधिक की लागत के साथ 90 किमी दोहरी पटरियां जोड़ेगा. जेटली ने कहा कि बेंगलुरू शहर में 160 किमी लंबे उपनगरीय रेल नेटवर्क की भी योजना है जिस पर 17,000 करोड़ रूपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है.