कल्‍पना चावला: फिर तेरी कहानी याद आई, दुनिया का भारत की बहादुर बेटी को नमन

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नई दिल्‍ली: भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्‍पना चावला कोलंबिया अंतरिक्षयान दुर्घटना में 1 फरवरी को हमें छोड़कर चली गईं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ‘मन की बात’ में भी देश की इस बहादुर बेटी को याद किया. पीएम मोदी ने मन की बात में कहा था, ‘1 फरवरी अंतरिक्ष यात्री कल्‍पना चावला की पुण्‍य तिथि है. उन्‍होंने देश को, खासतौर पर लड़कियों को यह संदेश किया है, ‘महिलाओं के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, अगर उनकी इच्‍छाशक्ति मजबूत है.’ आज उनकी पुण्‍यतिथि पर दुनियाभर में उन्‍हें याद किया जा रहा है.

कल्पना चावला का 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में पैदा हुईं. कल्पना की शुरुआती पढ़ाई करनाल के ही टैगोर बाल निकेतन में हुई थी. कल्‍पना चावला, जिन सामाजिक परिस्थितियों में थीं, उनमें उनके जैसे सपनें के बारे में सोचना भी कठिन था. लेकिन कल्‍पना के सपने उन्‍होंने खुद चुने थे और उन्‍हें पूरा करने में वह कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थीं. लिहाजा चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कल्पना ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की पढ़ाई की.

इसके बाद उन्होंने टैक्सस यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम.टेक की पढ़ाई पूरी की. यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. साल 1988 में कल्पना चावला के नासा ज्वॉइन करने का सपना पूरा हुआ. उनकी नियुक्ति नासा के रिसर्च सेंटर में की गई.