मिसाल : गुजरात में एक मुस्लिम ने कराया 500 साल पुराने हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार

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अहमदाबाद : अयोध्या में राम मंदिर विवाद का हल कहीं नजर नहीं आ रहा है. इस मुद्दे पर जमकर राजनीति हो रही है, वहीं गुजरात में मुस्लिमों ने आपसी भाईचारे की एक मिसाल पेश करते हुए सैकड़ों साल पुराने हनुमान मंदिर का कायाकल्प कराया है.

500 साल पुराना है मंदिर
अहमदाबाद के मिर्जापुर इलाके में एक हनुमान मंदिर बहुत ही जर्जर हालत में था. बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है. इस मंदिर का भवन लगभग ढह चुका था. लोग मंदिर तो आते और चढ़ावा चढ़ा कर चले जाते, किसी ने इसके भवन की ओर ध्यान नहीं दिया. अहमदाबाद के रहने वाले मोईन मेमन पेशे से बिल्डर हैं.

मुस्लिम ने कराया जीर्णोद्धार
मोईन अक्सर उस रास्त से होकर गुजरते हैं, यहां यह मंदिर है. मोईन ने बताया कि वह अक्सर इस मंदिर के भवन की हालत के बारे में सोचा करते थे. एक दिन उन्होंने अपनी गाड़ी रोकर मंदिर में अंदर जाकर मुआयना किया. बस फिर क्या था, अगले दिन से मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हो गया.

Hanuman Mandir
मोईन मेमन पेशे से एक बिल्डर हैं. इन्होंने मिर्जापुर के हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया है

मोईन की पहल की चारों ओर प्रशंसा
मोईन ने बताया कि वह बचपन से इस मंदिर से देखते आ रहे हैं. इसकी जर्जर हालत को देखकर दुख होता था. उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार की बात वहां काम करने वाले पुजारी को बताई. पुजारी ने भी एक मुस्लिम द्वारा मंदिर के निर्माण पर खुशी जताते हुए इस पर अपनी सहमति दे दी. मेमन ने कहा कि सुकून शांति देश में रहेगी, इसके लिए हिन्दू-मुस्लिम भाइयों को एकजुट होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मंदिर के निर्माण में उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि मंदिर का पुरात्व महत्व बरकरार रहे. मोईन इस पर कहते हैं कि वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि तमाम हनुमान भक्तों के बीच इस काम के लिए उन्हें चुना गया.

बिहार में भी बनवाया मंदिर
बिहार के बेगूसराय जिले में रामनवमी के दौरान मुस्लिमों ने एक हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कर सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल पेश की. जिले के बखरी क्षेत्र में इस मंदिर के लिए मुस्लिम परिवारों ने न केवल अपनी जमीन दान दी, बल्कि अपनी क्षमता के हिसाब से आर्थिक मदद की और श्रमदान भी किया.

दरअसल बखरी के शहीद चौक पर स्थापित प्राचीन हनुमान मंदिर काफी जर्जर हो गया था. जगह की कमी के कारण श्रद्धालुओं को यहां पूजा-पाठ में काफी परेशानी होती थी इसे देखते हुए बखरी के थाना प्रभारी ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्थानीय लोगों से बात की. मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए तो सभी तैयार थे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या जमीन को लेकर थी. मंदिर के आसपास मुस्लिम परिवारों की जमीन थी. जब इस बारे में मुस्लिम परिवारों से बात की गई, तो वे खुद आगे आए.