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‘उत्तर कोरिया नहीं, बल्कि सीरिया है दुनिया का सबसे खतरनाक देश’

नई दिल्ली: द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित लेख में थॉमस एल. फ्रीडमैन ने इस बात को उजागर किया है कि उत्तर कोरिया नहीं, बल्कि सीरिया सबसे खतरनाक देश है. हालांकि महज 14 दिन पहले ही फ्रीडमैन ने कोरियाई प्रायद्वीप को सबसे खतरनाक बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी इस सोच में बदलाव करते हुए माना कि दुनिया में सबसे खतरनाक अगर कोई मुल्क है तो वह सीरिया है. उन्होंने अपने लेख में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव, इजरायल और यरूशलम के बीच चल रहे संघर्ष के साथ ही दुनिया के सभी हिस्सों में चल रहे संघर्षों का जिक्र किया है.

थॉमस एल. फ्रीडमैन ने लिखा, ”शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन के दौरान उत्तर कोरिया और दक्षिम कोरिया के खिलाड़ियों को एक साथ मार्च करते हुए देखने के बाद, और उसी दौरान इजरायल दीवार सीरिया से उड़ान भरने वाले ईरानी ड्रोन को मार गिराने, सीरिया में एक ईरानी शिविर पर बम गिराने और सीरियाई मिसाइल के हमले में एक एफ-16 विमान को खोने के बाद; और सीरिया में अमेरिक फौजों के बिल्कुल करीब रूसी ‘ठेकेदारों’ के समूहों को अमेरिकी जेट से मारते देखकर लगता है कि सीरिया-इजरायल-लेबनान सीमा दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका है.”

सभी एक-दूसरे से लड़ रहे हैं
इसके आगे वो लिखते हैं, ”ऐसा कहां देखने को मिलता है, जब सीरियाई, रूसी, अमेरिकी, ईरानी और तुर्क फौजी जमीन या हवा में एक-दूसरे से लड़ रहे हों और उनके साथ ही इराक, लेबनान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ईरान समर्थक शिया लड़ाके; उत्तरी सीरिया से अमेरिकी समर्थक कुर्द लड़ाके; आईएसआईएस के बचे-खुचे लड़ाके; सऊदी तथा जॉर्डन समर्थक सीरियाई शासन विरोधी विभिन्न सुन्नी विद्रोही और ‘बर्बर जंगलियों’ से ‘मदर रशिया’ की रक्षा करने के लिए सीरिया गए सीरियाई शासन समर्थक रूसी कट्टरपंथी एक दूसरे से लड़ रहे हों?”

कुछ सैनिकों को ही जोखिम में डालने की प्रवृत्ति
फ्रीडमैन ने लिखा, ”पिछले एक हफ्ते के दौरान ही रूस, तुर्की, ईरान और इजरायल ने सीरिया में दुश्मनी की आग में अपने विमान खो दिए. ‘पाउडर केग’ (बारूद रखने का ड्रम) शब्द का आविष्कार इसी जगह के लिए किया गया था.  सीरियाई युद्ध के बारे में अच्छी और बुरी खबर यह है कि इसमें शामिल सभी पक्ष एक नियम द्वारा निर्देशित होते हैं- आप इस युद्ध की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते. बुनियादी तौर पर यह एक भाड़े का युद्ध है. हरेक पक्ष अपने खुद के कुछ सैनिकों को ही जोखिम में डालकर अपने हितों को अधिकतम और अपने विरोधियों के प्रभाव को कम करना चाहता है और इसके बजाय अपने लक्ष्यों को अपनी वायुसेना की शक्ति, भाड़े के सैनिकों  और स्थानीय विद्रोहियों के जरिए हासिल करना चाहता है.”

सीरिया ने सीखा है सबक
फ्रीडमैन ने लिखा, ”अपने पुराने अनुभवों (अफगानिस्तान से रूस, ईरान-इराक युद्ध से ईरान, दक्षिण लेबनान से इजरायल और इराक व अफगानिस्तान से अमेरिका) से उन्होंने यह सबक सीख लिया है कि उनकी जनता मध्य-पूर्व में किसी भी जमीनी युद्ध में लड़ते हुए इतनी ज्यादा संख्या में लाशों को बर्दाश्त नहीं करेंगी. व्लादिमीर पुतीन रूसी लोगों को बताना चाहते हैं कि महाशक्ति के रूप में रूस की वापसी हो गई है और वही सीरिया में किंगमेकर हैं. लेकिन वह किसी रूसी सैनिक को जोखिम में नहीं डाल रहे हैं.”

अपने लेख के अंत में फ्रीडमैन ने इस बात की उम्मीद भी जताई है कि एक दिन समय आने पर यह गृहयुद्ध भी खत्म हो जाएगा. वो लिखते हैं, ”हो सकता है अंत में सभी खिलाड़ी थक जाएंगे और सीरिया में एक सत्ता-साझेदारी समझौता करेंगे, जैसा कि लेबनान ने 1989 में गृहयुद्ध खत्म करने के किया था। अफसोस, लेबनान को इस फैसले तक पहुंचने में 14 साल लगे थे. इसलिए सीरिया से कुछ और खबर सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए.”

हाल के घटनाक्रम पर एक नजर:

इजरायल ने सीरिया पर किया हवाई हमला
इजरायली सेना ने कहा कि बीते 10 फरवरी को एक इजरायली एफ-16 विमान को मार गिराए जाने के बाद सीरिया में हवाई रक्षा प्रणाली और ईरानी लक्ष्यों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले किए गए. समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि उसने तीन हवाई रक्षा बैटरियों और चार ईरानी लक्ष्यों सहित कुल 12 लक्ष्यों पर हमले किए. आईडीएफ ने बताया कि सीरिया में विमान भेदी मिसाइल के जरिए उसके एक एफ-16 विमान को मार गिराया गया, जिसके बाद हमले शुरू किए गए. इजरायली विमान सीरिया में ईरानी ड्रोन संचालित केंद्रों पर हमला करने के अभियान पर था. ईरानी और ईरान समर्थित बलों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थन में लड़ते हुए सीरिया में अपने पैर जमा लिए हैं.

अमेरिका के साथ संबंध टूटने का खतरा : तुर्की
तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत काउसोगलू ने बीते 12 फरवरी को कहा कि तुर्की व अमेरिका के बीच संबंध टूटने के करीब है. दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव सीरियाई डेमोक्रेटिक बलों को अमेरिकी समर्थन की वजह से आया है. द्विपक्षीय संबंधों के ‘नाजुक स्थिति’ में होने की घोषणा करते हुए काउसोगलू ने कहा, “हम या तो संबंधों को ठीक करेंगे या पूरी तरह से टूट जाएंगे.” तुर्की के सैनिकों ने 20 जनवरी से सीरिया के उत्तरपश्चिम में वाईपीजी के अधिकार वाले अफरीन पर हवाई और जमीनी हमले शुरू किए हैं. तुर्की कुर्द विद्रोहियों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार करता है.

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