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फूलपुर: ऐसी VIP सीट जिसने, नेहरू, ‘जूनियर लोहिया’, वीपी सिंह को पहुंचाया संसद

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है. इन दोनों सीटों पर उपचुनाव के तहत आगामी 11 मार्च को मतदान होगा और परिणामों की घोषणा 14 मार्च को की जाएगी. यूपी की दोनों सीटें वीआईपी मानी जाती हैं. खासकर फूलपुर सीट का भारतीय चुनाव से एक खास नाता है. भारत की आजादी के बाद फूलपुर की जनता ने जिस नेता को लोकसभा में भेजा था, उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था. ये भी कह सकते हैं कि फूलपुर की जनता ने ही देश को पहला प्रधानमंत्री दिया था. ये नेता कोई और नहीं बल्कि पंडित जवाहर लाल नेहरु थे. आइए जानते हैं आखिर क्यों वीआईपी सीट मानी जाती है फुलपुर.

  1. 2014 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर सीट से बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य सांसद चुने गए थे. उनके राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट खाली हुई है. केशव मौर्य इस सीट से जीतने वाले बीजेपी के पहले सांसद हैं.
  2. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में पहली लोकसभा में पहुंचने के लिए इसी सीट को चुना और लगातार तीन बार 1952, 1957 और 1962 में उन्होंने यहां से जीत दर्ज कराई थी. देश का पहला पीएम देने के चलते इस सीट को ‘वीआईपी’ माना जाता है.
  3. साल 1962 में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया खुद जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ फूलपुर सीट से चुनाव लड़े थे, हालांकि वे हार गए थे.
  4. नेहरू के निधन के बाद फूलपुर सीट से उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित चुनाव में खड़ी हुईं. विजय लक्ष्मी पंडित के खिलाफ 1967 के चुनाव में समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र थे. हालांकि यहां की जनता ने विजय लक्ष्मी पर ही भरोसा जताया.
  5. साल 1969 में विजय लक्ष्मी पंडित ने संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि बनने के बाद सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था.
  6. साल 1969 में उपचुनाव में समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र ने सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे.
  7. साल 1971 के लोकसभा चुनाव में विश्वनाथ प्रताप सिंह यहां से कांग्रेस की टिकट पर जीते थे. बाद में विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के प्रधानमंत्री बने.
  8. इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में यहां से जनता पार्टी उम्मीदवार कमला बहुगुणा ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के रामपूजन पटेल को हराया था. हालांकि सांसद बनने के बाद कमला ने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया था.
  9. 1980 में मध्यावधि चुनाव हुए तो इस सीट से लोकदल के उम्मीदवार प्रफेसर बी.डी.सिंह ने जीत दर्ज की.
  10. 1984 में हुए चुनाव में फूलपुर सीट से एक बार फिर कांग्रेस के प्रत्याशी रामपूजन पटेल जीते. बाद में रामपूजन पटेल जनता दल में शामिल हो गए थे और वे 1989  और 199 के चुनावों मं यहीं से सांसद बने. पंडित नेहरू के बाद फूलपुर सीट से रामपूजन पटेल ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की.
  11. 2004 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर से बाहुबली नेता अतीक अहमद जीते.
  12. अतीक अहमद के बाद 2009 में पहली बार इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने भी जीत हासिल की. जबकि बीएसपी के संस्थापक कांशीराम यहां से ख़ुद चुनाव हार चुके थे.
  13. इतने बड़े-बड़े नेताओं को संसद में पहुंचाने के बाद भी फूलपुर में विकास के नाम पर सिर्फ इफ की यूरिया फैक्ट्री भर है.
  14. 1951-52 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए. तब इलादाबाद और जौनपुर जिले को मिलाकर लोकसभा के कुल 4 सांसद चुने जाते थे. ये सीटें- जौनपुर पूर्व, इलाहाबाद पूर्व, जौनपुर पश्चिम, इलाहाबाद पश्चिम थीं. इलाहाबाद पूर्व और जौनपुर पश्चिम से दो सांसद चुने जाते थे.
  15. 1951-52 में इलाहाबाद पूर्व और जौनपुर पश्चिम से कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू और मासूरिया दीन सांसद चुने गए थे. 1957 में इलाहाबाद पूर्व और जौनपुर पश्चिम लोकसभा सीट का नाम बदलकर फूलपुर कर दिया गया. कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू और मासूरिया दीन फिर से सांसद चुने गए.
  16. 1962 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन में फूलपुर लोकसभा सीट चायल और फूलपुर सीट में बदल दिया गया.
  17. आजादी के बाद हुए 16 चुनावों और 2 उपचुनावों में कांग्रेस पार्टी सात बार, जनता दल दो बार, एसएसपी एक बार, बीएलडी एक बार और जनता पार्टी सेक्यूलर ने एक बार जीत दर्ज की है. एसपी ने इस सीट पर लगातार 4 बार जीत दर्ज की जबकि बीजेपी और बीएसपी सिर्फ 1-1 बार जीत दर्ज कर पाए हैं.
  18. नेहरू के निधन और विजयलक्ष्मी के यूएन में चुने जाने के बाद केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे की वजह से खाली पड़ी इस सीट पर इस बार तीसरी बार उपचुनाव होगा.
  19. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने फूलपुर सीट से क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को मैदान में उतारा था, हालांकि वे हार गए थे.
  20. इस सीट पर मुस्लिम, पटेल और कायस्थ बिरादगी के सबसे ज्यादा वोटर हैं. इसके बाद ब्राह्मण और अनुसूचित जाति के वोटों का नंबर आता है. फूलपुर संसदीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा पटेल मतदाता हैं. यहां इनकी संख्या करीब सवा दो लाख है. मुस्लिम, यादव और कायस्थ मतदाताओं की संख्या भी इसी के आसपास है. लगभग डेढ़ लाख ब्राह्मण और एक लाख से अधिक अनुसूचित जाति के मतदाता हैं.
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