यूपी की राजनीति में जुड़ा नया अध्याय, SP-BSP में दोस्ती, कांग्रेस के चेहरे पर लौटी मुस्कान

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए 4 मार्च 2018 का दिन ऐतिहासिक हो गया है. पिछले 25 साल से एक-दूसरे को फूटी आंख न सुहाने वाली पार्टियां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच दोस्ती हो गई है. फिलहाल यह दोस्ती गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर हुई है. गोरखपुर में रविवार को हुई बीएसपी की बैठक में सपा उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला लिया गया है. इसके अलावा तय हुआ कि राज्यसभा चुनाव में बीएसपी के विधायक सपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करेंगे.

सपा-बसपा की दोस्ती से कांग्रेस में खुशी
सपा और बसपा के बीच दोस्ती की खबर से कांग्रेस पार्टी काफी खुश है. उपचुनावों में अकेले लड़ रही कांग्रेस ने कहा कि फिरकापरस्त ताकतों को 2019 के लोकसभा चुनाव में हराने के लिए सभी दल एक साथ आते हैं तो इससे ज्यादा अच्छी बात क्या होगी. कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि सपा और बीएसपी की दोस्ती अच्छी खबर है.

बीएसपी और सपा नेता गोरखपुर में मंच पर एकसाथ हाथ उठाकर एक दूसरे का साथ देते हुए नजर आए. दोनों ने एक दूसरे की उम्मीद का दामन थामकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को दबाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. देखना यह है कि इस प्रयास में दोनों का साथ कितना काम आता है. बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) की जिला स्तरीय बैठक के दौरान घनश्याम चंद्र खरवार ने मंच से घोषणा की कि वह समाजवादी पार्टी को समर्थन दे रहे हैं. वहीं मंच से घनश्याम चंद खरवार ने कहा की बीएसपी सुप्रीमो मायावती के आदेश के बाद हम लोगों ने सपा को समर्थन दिया है और गोरखपुर मे निषाद पार्टी के प्रत्याशी को लड़ाया जा रहा है. इस बार हम लोग बहुत ज्यादा मतों से विजयी होंगे.

बीएसपी के मुख्य जोनल इंचार्ज घनश्याम चंद खरवार ने कहा कि हम इस दोस्ती को बनाए रखने की पूरी कोशिश करेंगे. वहीं गोरखपुर से सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने कहा कि बीजेपी से निपटने के लिए हमारी ये दोस्ती रंग लाएगी. बीएसपी नेता आफताब आलम ने कहा कि राज्य की जनता मौजूदा सरकार से त्रस्त है, जनता की मांग पर उपचुनाव में सपा को समर्थन देने का फैसला लिया गया है.

गठबंधन पर अब तक नहीं आया मायावती-अखिलेश का बयान
सपा और बीएसपी के नेता उपचुनाव में गठबंधन की बात कह चुके हैं, लेकिन इस पूरे मसले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो का कोई बयान नहीं आया है. सपा-बसपा ये गठबंधन स्थानीय स्तर पर करने जा रहे हैं, लेकिन जो लोग अखिलेश यादव और मायावती को बेहद करीब से जानते हैं, उनके मुताबिक ये गठबंधन अखिलेश और मायावती के बीच बातचीत के बाद ही संभव हो सकता है. क्योंकि मायावती-अखिलेश की मर्जी के बिना बसपा-सपा में पत्ता तक नहीं हिल सकता है.