मुंबई : महज 200 रुपये में बनाए जाते हैं फर्जी Aadhaar और पैन कार्ड

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मुंबई : बांग्लादेशी आतंकी संगठन ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम’ (एबीटी) भारत के खिलाफ एक बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में है. यह खुलासा महाराष्ट्र एटीएस पहले ही कर चुका है. इस मामले में एटीएस ने हाल ही में पुणे, महाड और अंबरनाथ से 5 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार भी किया जिनके पास से फर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए. महाराष्ट्र एटीएस ने महाराष्ट्र में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों के खिलाफ मुहीम शुरू करते हुए पिछले 2 हफ़्तों में 2 दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है.

अवैध रूप से रह रहे हैं बांग्लादेशी
लेकिन सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई के बाद देशभर में छिपे अवैध बांग्लादेशी और आतंकी संगठन एबीटी से जुड़े सदस्य फर्जी पहचान पत्र की मदद से अपने ठिकाने बदलने की फिराक में हैं. ऐसे में आखिर ये फर्जी पहचान पत्र कौन लोग और कैसे बनाते हैं, इसके लिए ज़ी मीडिया की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ने अपनी पड़ताल शुरू की. पड़ताल में ये खुलासा हुआ कि एक तरफ जहां एटीएस ने फर्जी आधार कार्ड या पैन कार्ड जैसे पहचान पत्र बनाने वालों पर भी भले ही शिकंजा कसना शुरू कर दिया हो, लेकिन मुंबई के कई इलाकों में फर्जी पहचान पत्र बनाने का गोरख धंधा धड़ल्ले से चल रहा है.

इन ठिकानों पर महज दो सौ रुपये में फर्जी पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग इन्हें बनवा भी रहे हैं. मुंबई के मालवणी इलाके में पिछले हफ्ते ही एटीएस ने अवैध रूप से रहने वाले कुछ बांग्लादेशियों की गिरफ्तार किया था. इसी मालवणी इलाके से कुछ युवक आईएसआईएस में शामिल होने के लिए इराक तक पहुंच गए थे.

फर्जी टिकट का धंधा
मालवणी के झुग्गी बस्तियों में एक एजेंट से पहचान पत्र बनवाने से पहले तत्काल कोटे में मुंबई से दिल्ली की स्लीपर क्लास ट्रेन टिकट बुक करने के लिए पूछताछ की. एजेंट ने तुरंत एक हज़ार रुपये में अगले दिन सुबह ठीक 11 बजे कन्फर्म टिकट देने का दावा किया, जिसके लिए 200 रुपये भी दिए गए. अगले दिन सुबह बकाया रकम 800 रुपये देने पर एजेंट ने वाकई कन्फर्म टिकट दे दिया.

बांद्रा टर्मिनल से हज़रत निजामुद्दीन जाने वाली संपर्कक्रांति एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की ये टिकट राजेश कुमार के नाम से बुक की गई. ये टिकट 11 बजकर, 1 मिनट, 57 सेकंड पर बुक हुई. यानी तत्काल बुकिंग शुरू होने के कुछ समय बाद टिकट एक ख़ास सॉफ्टवेयर की मदद से बुक की गई. जब आम जनता बुकिंग पेज पर अपनी जानकारी भर रही होती है तब तक शुरुवात के 2 मिनट के भीतर ही ये एजेंट ऐसे सॉफ्टवेयर की मदद से आसानी से टिकट बुक कर लेते हैं.

बनाए जाते हैं फर्जी आधार कार्ड
टिकट लेने के बाद इसी दिन शाम को इस एजेंट के दफ्तर में फिर से संपर्क किया गया. इस बार हमने बहाना बनाया कि राजेश कुमार किसी इमरजेंसी की वजह से इस ट्रेन में तय समय पर सफर नहीं कर सकता. उसका मुंबई में रहना बहुत जरूरी है, लेकिन दिल्ली पहुंचना भी उतना ही ज़रूरी है. ऐसे में क्या किसी दूसरे साथी को फर्जी पहचान पत्र के साथ इस टिकट पर दिल्ली भेजा जा सकता है?

इस पर एजेंट ने बताया कि महज़ 200 रुपये में वह एक फर्जी पहचान पत्र बनाकर दे देगा. एजेंट ने हमारे साथी कृष्ण सिंह का आधार कार्ड मांगा और पूरे यकीन से कहा कि आपको कृष्ण सिंह का राजेश कुमार नाम से फर्जी आधारकार्ड कल शाम ट्रेन छूटने से पहले ही मिल जाएगा.  तीसरे दिन ट्रेन के बांद्रा टर्मिनल से छूटने के कुछ घंटों पहले ही एजेंट ने हमें कृष्ण सिंह का आधार कार्ड और इसी शख्स का एक और फर्जी आधार कार्ड (राजेश कुमार के नाम से) दे दिया.

एजेंट ने हमें हिदायत दी कि इस फ़र्ज़ी टिकट का इस्तेमाल सिर्फ ट्रेन यात्रा के लिए ही करें और दिल्ली पहुंचते ही इसे फाड़कर फेंक दिया जाए. इस तरह ट्रैन टिकट से लेकर फर्जी पहचान पत्र बनाने का गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है.

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