जानें, उस दलित हिंदू महिला के बारे में जिसने पाकिस्तान में रच दिया है इतिहास

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नई दिल्ली: मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान में हिंदू महिला कृष्णा कोहली ने इतिहास रच दिया है. वे पाक की पहली दलित हिंदू महिला सीनेटर बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि पर दुनियाभर से उन्हें शुभकामनाएं दी जा रही हैं. लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचे वाली कृष्णा कोहली को अपने जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्हें और उनके परिवार को कई सालों तक बंधुआ मजदूर तक का काम करना पड़ा था.

तीन साल तक रहीं बंधुआ मजदूर
कृष्णा का जन्म 1979 में सिंध के नगरपारकर जिले के एक दूरदराज गांव में हुआ था. वे एक गरीब परिवार से आती हैं. बचपन में उन्हें व उनके परिवर को एक जमींदार ने बंधक बना लिया था. जहां उनसे बंधुआ मजदूर की तरह काम करवाया जाता था. परिवार करीब तीन साल तक इस बुरी स्थिति से गुजरा.

16 साल की उम्र में शादी
कृष्णा कोहली की 16 साल की उम्र में ही लालचंद से शादी कर दी गई थी. वे उस समय नौवीं कक्षा में पढ़ती थीं. शादी के बाद उनके पति ने उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने में मदद की. साल 2013 में उन्होंने सिंध विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.

सामाजिक कार्यों से जुड़ाव
पढ़ाई करते हुए ही कृष्णा सामाजिक कार्यों से जुड़ गईं थीं. उन्हें साल 2007 में इस्लामाबाद में आयोजित तीसरे मेहरगढ़ मानवाधिकार नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर के लिए चुना गया था. समाज के लिए अपने कार्यों के कारण कृष्णा पाकिस्तान में बड़े चेहरे के तौर पर उभरीं.

ऐसे हुई पीपीपी में एंट्री
कृष्णा कोहली का राजनीति से दूर-दूर तक वास्ता नहीं था. वे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से जुड़ी थीं. बाद में उनके भाई को यूनियन काउंसिल बेरानो का चेयरमैन के रूप में चुना गया. वहीं, फरवरी 2018 में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यक के लिए सीनेट की एक सीट पर उन्हें नामित किया. इसके चुनाव में वे जीत गईं.

स्वतंत्रता सेनानी थे दादा
पाकिस्तान की पहली दलित हिंदू महिला सीनेटर बनने का गौरव हासिल करने वाली कृष्णा कोहली के दादा स्वतंत्रता सैनानी थे. उनके दादा रूपलो कोहली ने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. कुछ महीनों बाद उन्हें अंग्रेजी सरकार ने फांसी की सजा सुना दी थी.