महात्मा गांधी ने जिस पत्र में की थी ईसाइयत पर चर्चा, 32.5 लाख रुपए में हुआ नीलाम

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वॉशिंगटन: अमेरिका के एक शख्स ने महात्मा गांधी के उस पत्र को 32.5 लाख रुपए में खरीदा है जिसमें उन्होंने ईसा मसीह की मौजूदगी और इसाईयत की प्रकृति पर चर्चा की थी. टाइप किए गए पत्र पर गांधी के हस्ताक्षर भी हैं. पत्र पर छह अप्रैल, 1926 की तारीख अंकित है. गांधी ने इसे साबरमती आश्रम से लिखा था. हालांकि नीलामीघर ने पत्र को खरीदने वाले का नाम बताने से इनकार कर दिया है. यह पत्र बीते कई दशक से एक निजी संग्रह का हिस्सा था. राब कलेक्शन के प्रमुख नाथन राब ने पत्र को शांति की दिशा में गांधी का दृष्टिकोण माना है. उन्होंने कहा, ‘ईशू में उनका विश्वास मानवता के एक गुरु के तौर पर था, जो उनके समकक्ष लोगों के साथ समानता तलाशने का उनका एक प्रयास दर्शाता है.’

अमेरिका के मिल्टन न्यूबेरी फ्रैंट्ज में ईसाई धर्मगुरु को संबोधित करते हुए गांधी ने लिखा, ‘ईशु मानवता के सबसे महान गुरुओं में से एक थे.’

(Photo courtesy- Raab Collection)

हल्की स्याही में टाइप किया गया और गहरे रंग की स्याही से हस्ताक्षर किया यह पत्र बीते कई दशक से संग्रहित एक निजी संग्रह का हिस्सा था. ऐसा माना जाता है कि फ्रैंट्ज  ने गांधी को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने ईसाइयत पर लिखे लेख को पढ़ने की अपील की थी. उस समय, गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उभरते नायक थे. गांधी ने फ्रैंट्ज की अपील का सम्मान करते हुए उन्हें जवाबी पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने ईसा मसीह की प्रशंसा की थी. गांधी को पता था कि अहिंसा को अटूट विश्वास और साहस की जरूरत होगी और इसके लिए उसने महसूस कर लिया था कि यह हर किसी के पास नहीं होता है. इसलिए उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को परामर्श दिया कि उन्हें अहिंसा को अपने पास रखने की जरूरत नहीं है.