नागालैंड में नेफियो रियो ने की राम माधव से मुलाकात, क्या चौथी बार बनेंगे सीएम?

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नई दिल्लीः  नागालैंड में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. हालांकि बीजेपी गठबंधन वहां सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है. राज्य की 60 विधानसभा सीटों में सरकार बनाने के लिए 31 सीटें चाहिए बीजेपी और एनडीपीपी (नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी) को 29 सीटें मिली है. जबकि सत्ताधारी नागा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) को 25 सीटें मिली हैं. 6 सीटें अन्य के खाते में गई है. नागालैंड में कांग्रेस और एनसीपी का खाता भी नहीं खुला है. बीजेपी को राज्य में बहुमत के लिए मात्र दो सीटें चाहिए. विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बीजेपी ने एनपीएफ से अलग होकर एनडीपीपी से गठबंधन किया था. इन चुनावों में तय हुआ था कि नेफियो रियो की नई नवेली पार्टी (NDPP) 40 और बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

एनडीपीएफ के नेता और नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री नेफियो रियो ने दीमापुर (नागालैंड) में मौजूद बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव से मुलाकात की. ऐसा माना जा रहा है की बीजेपी गठबंधन की तरफ से एनडीपीपी नेता नेफियो रियो को एक बार फिर से राज्य की कमान सौंपी जा सकती है. रियो पहले भी तीन बार नागालैंड के सीएम रह चुके हैं. नेफियो रियो की राजनीतिक हैसियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार जब वह ‘अंगामी-2’ सीट से मैदान में उतरे तो निर्विरोध विधायक चुन लिए गए. उनके खिलाफ मैदान में उतरे एकमात्र उम्मीदवार नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चुपफो अंगामी ने नाम वापस लेने आखिरी दिन अपना नाम वापस ले लिया. आपको बता दें कि नेफियो रियो साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सांसद का चुने गए थे. लेकिन 28 फरवरी 2018 को यानि नागालैंड विधानसभा चुनावों के नतीजे आने से दो दिन पहले उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था.

एक निर्दलीय उम्मीदवार ने पहले ही बीजेपी गठबंधन को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. राजधानी कोहिमा में निर्दलीय विधायक तोंगपांग ओजकुम ने बीजेपी की सहयोगी एनडीपीपी के नेता नेफियो रियो को समर्थन का पत्र सौंपा.

 बता दें कि नेफियो रियो साल1989 से विधानसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं. शुरुआती दिनों में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. पहली बार विधायक बनने के बाद से ही रियो राज्य मंत्रिमंडल का हिस्सा बने रहे. बाद में नेफियो रियो ने डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ नागालैंड को ज्वाइन कर लिया था. साल 2003 में नेफियो रियो की अगुवाई में डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ नागालैंड के ज्यादातर सदस्यों ने गुट बना लिया और पार्टी का नाम नागालैंड पीपुल्स फ्रंट (NPF) कर दिया.

नेफियो रियो ने नागालैंड पीपुल्स फ्रंट के अगुवा बनकर बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया था. यह गठबंधन सत्ता में आई तो नेफियो रियो पहली बार मुख्यमंत्री बने. इसके बाद नेफियो रियो लगातार 2014 तक मुख्यमंत्री बने रहे.  साल 2014 में एक बार फिर से नागा पीपुल्स फ्रंट और बीजेपी गठबंधन सत्ता में आई लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टीआर जेलियांग को बिठाया गया. यह बात नेफियो को पसंद नहीं आई. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नेफियो ने भाग्य आजमाया और वे पहली बार संसद पहुंचे.

इसी बीच नेफियो ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बातचीत के बाद नागालैंड पीपुल्स फ्रंट को तोड़कर नेशनल डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (एनडीपीपी) बना लिया. चुनाव में एक बार फिर से नेफियो ने बीजेपी से गठबंधन कर लिया. तय हुआ कि नेफियो की नई नवेली पार्टी 40 और बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.