उत्तर कोरिया पर अमेरिका ने कसा शिंकजा, लगाए नए प्रतिबंध

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वॉशिंगटन: अमेरिका ने किम जोंग उन के सौतेले भाई किम जोंग नैम की हत्या में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल करने के लिए उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. किम जोंग नैम की फरवरी 2017 को हत्या कर दी गई थी. समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, ये नए प्रतिबंध 13 फरवरी 2017 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के हवाईअड्डे पर हुई किम जोंग नैम की हत्या की जांच खत्म होने के बाद लगाए गए हैं. इस जांच में पता चला कि किम जोंग नैम की हत्या वीएक्स नाम के एक घातक रसायन से की गई थी.

इसके बाद अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर केमिकल एंड बायोलॉजिकल वेपन्स कंट्रोल एंड वारफेयर एलिमिनेशन एक्ट 1991 के तहत प्रतिबंध लगा दिए. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, ये नए प्रतिबंध सोमवार से प्रभावी हो गए हैं.

यह ऐलान उसी दिन हुआ, जब किम जोंग उन ने कहा था कि वह कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर अमेरिका के साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं, जिसका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वागत किया था कि और उम्मीद जताई थी कि इससे सकारात्मक परिणाण होंगे.

उत्तर कोरिया के मददगार जहाज, कंपनियों पर प्रतिबंध की मांग 
25 फरवरी को अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए उसकी मदद करने के लिए विश्व भर के बंदरगााहों के 33 पोतों पर प्रतिबंध लगाने तथा 27 शिपिंग कारोबारों को ब्लैक लिस्ट करने की मांग संयुक्त राष्ट्र से की थी.

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति से यह मांग ऐसे वक्त की थी. जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (23 फरवरी) को उत्तर कोरिया पर अब तक के सर्वाधिक कड़े प्रतिबंध लगाने की घाोषणा की. जापान ने भी 33 पोतों में से तीन पोतों के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन करते हुए उत्तर कोरिया की मदद के वास्ते, प्योंगयांग भेजे जा रहे तेल का एक पोत से दूसरे पोत में स्थानांतरण करने के मुद्दे पर चिंता जताते हुए अमेरिका की मांग का समर्थन किया था.

परिषद के सदस्यों के पास प्रस्तावित प्रतिबंधों पर आपत्ति उठाने के लिए शुक्रवार (2 फरवरी) तीन बजे तक का वक्त था. और अगर उत्तर कोरिया के सहयोगी चीन सहित कोई सदस्य देश इस अनुरोध को ब्लॉक नहीं करता तो यह प्रतिबंध प्रभावी हो जाएगा. गौरतलब है कि उत्तर कोरिया के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम को धन मिलने से रोकने के वास्ते इसके सामान के निर्यात पर रोक लगाने के लिए परिषद ने पिछले साल अनेक प्रस्ताव स्वीकार किए थे.