‘AIR INDIA में हिस्सेदारी बेचने के बजाय उसकी संपत्ति बेचकर जुटायें धन’

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( आरएसएस ) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने मौजूदा तरीके से एयर इंडिया के विनिवेश का विरोध किया. उसने कहा कि सरकार को कर्ज भुगतान के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने के बजाय एयर इंडिया की संपत्तियों की बिक्री कर धन जुटाना चाहिये. मंच के सह- संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि एयर इंडिया को परिचालन से मुनाफा हो रहा है लेकिन ऋण बोझ के कारण यह घाटे में चली जा रही है. उन्होंने बताया कि, ‘‘अत इसमें हिस्सेदारी बेचने के बजाय सरकार को ऋण भार कम करने के लिए इसकी जमीनें बेचनी चाहिए.’’

महाजन का बयान इस लिए प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि यह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि एयर इंडिया को किसी विदेशी कंपनी के हाथों नहीं बेचा जाना चाहिए. महाजन ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच मौजूदा स्वरूप में एयर इंडिया के विनिवेश का विरोध करता है. उसने कहा कि ऋण का भुगतान कर कंपनी को मुनाफे में लाया जा सकता है.

उन्होंने एयरलाइंस की खराब स्थिति के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( संप्रग ) के कार्यकाल के दौरान एयर इंडिया के मुनाफे को अन्य कंपनियों के हाथों जाने दिया गया. एयर इंडिया में सरकार की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है. सरकार ने इसमें 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां मंगायी है.

एयर इंडिया का विनिवेश हो, पर मालिक भारतीय कंपनी ही बने
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा था कि एयर इंडिया का विनिवेश हो लेकिन इसका स्वामित्व उसी भारतीय कंपनी को दिया जाए, जो दक्ष तरीके से इसे चलाने में सक्षम है. उल्लेखनीय है कि सरकार ने कर्ज के बोझ से दबी राष्ट्रीय एयरलाइन की बिक्री की प्रक्रिया शुरू की है.

‘नया आपरेटर भारतीय खिलाड़ी ही होना चाहिए’
भागवत ने सरकार को चेताया था कि उसे अपने आकाश का नियंत्रण और स्वामित्व नहीं गंवाना चाहिए. उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के परिचालन का ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया.  संघ प्रमुख ने यहां ‘ भारतीय अर्थव्यवस्था और आर्थिक नीतियों ’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में कहा , ‘‘ एयर इंडिया का स्वामित्व उसी को दिया जाना चाहिए जो इसे दक्ष तरीके से चलाने में सक्षम है. नया आपरेटर भारतीय खिलाड़ी ही होना चाहिए. ’’

भागवत ने कहा कि दुनिया में कहीं भी राष्ट्रीय एयरलाइन में 49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है. उन्होंने विशेष रूप से जर्मनी का जिक्र किया जहां विदेशी हिस्सेदारी की सीमा सिर्फ 29 प्रतिशत है.  उन्होंने कहा कि यदि विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49 प्रतिशत को पार कर जाती है तो शेयरों को जब्त कर उन्हें घरेलू निवेशकों को बेचा जाना चाहिए , जैसा अन्य देशों में किया जाता है.

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