मिस्र: सैन्य कार्रवाई में 32 आतंकवादी गए मारे, 272 अड्डों को किया गया ध्वस्त

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काहिरा: मिस्र के अशांत उत्तर और मध्य सिनाई में पिछले कुछ दिनों में सेना की अलग अलग कार्रवाई में 32 आतंकवादी मारे गए हैं जबकि 272 आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दिया गया है. मिस्र की सेना ने फरवरी में आतंकवादियों के खिलाफ एक समग्र अभियान शुरू किया था. इसका नाम ‘‘समग्र अभियान सिनाई 2018’’ रखा गया था. ताजा अभियान इसीका हिस्सा था. सेना ने एक बयान जारी कर बताया, ‘‘पिछले कुछ दिनो में उत्तरी और मध्य सिनाई में सेना के विभिन्न अभियानों में 32 आंकवादी मारे गए हैं.

96 संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है
इसके अलावा 96 संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से नौ बहुत खतरनाक आतंकी हैं. ’’ बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने अपने अभियान में आतंकवादियों के 272 अड्डों को ध्वस्त कर दिया है. इन अड्डों में लड़ाई के सामान और विस्फोटक रखे हुए थे.

सिनाई प्रायद्वीप क्षेत्र में सैन्य अभियान में पिछले महीने 19 आतंकवादी मारे गए थे जबकि 20 अन्य घायल हो गए थे. सेना के आंकड़ों के अनुसार इस अभियान में अबतक 318 आतंकवादी मारे जा चुके हैं वहीं 37 सैन्यकर्मियों की भी मौत हुई है.

पूर्व राष्ट्रपति मुर्सी के 65 समर्थकों को हुई जेल
बता दें कि मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के 65 समर्थकों को अदालत ने शनिवार (17,फरवरी) को सरकार विरोधी दंगों, प्रदर्शनों और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए 10 साल कैद की सजा सुनाई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार जागजिग आपराधिक अदालत ने सभी मामलो में 44 अभियुक्तों को 10 साल जेल और 21 को दो साल जेल की सजा सुनाई है. वहीं, सरकार विरोधी दंगों, प्रदर्शनों और हिंसा को बढ़ावा देने के इस मामले में आठ लोगों को रिहा भी किया है.

सभी अभियुक्त मुस्लिम ब्रदरहुड धड़े के सदस्य और समर्थक
सजा पाने वाले दोषियों में अधिकतर पूर्व राष्ट्रपति मुर्सी की मुस्लिम ब्रदरहुड धड़े के सदस्य और समर्थक हैं. देश में मुस्लिम ब्रदरहुड धड़े को आतंकवादी संगठन मानकर प्रतिबंधित किया जा चुका है. बता दें कि देश में मुर्सी के शासन के विरोध में प्रदर्शन के बाद जुलाई 2013 में तख्तापलट हो गया था.

पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी भी भुगत रहे हैं सजा
गौरतलब है कि मोहम्मद मुर्सी इस समय 20 साल कारावास की सजा भुगत रहे हैं. यह सजा उनको 2012 में उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच रंक्तरंजित संघर्ष को भड़काने का दोषी ठहराते हुए दी गई है. इसके अलावा उनको गोपनीय दस्तावेज लीक करने के आरोप में 25 साल कारावास की सजा दी गई है.

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