झारखंडः पत्थलगड़ी समर्थकों से 30 घंटे के संघर्ष के बाद भी पुलिस के हाथ खाली

0
82

खूंटी (सन्नी शरद): झारखंड का एक जिला खूंटी इनदिनों देशभर में सुर्ख़ियों में है. खूंटी पहले नक्सलवाद के मामले में देश में पहले पायदान पर था तो फिर पथलगड़ी और बैंक ऑफ ग्राम सभा को खोलकर सुर्खियों में आया. इतना कुछ तो था ही लेकिन 19 जून को अड़की थाना क्षेत्र के कोचांग में 5 आदिवासी युवतियों के साथ हुए गैंगरेप के बाद खूंटी अंतराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है. सरकार और प्रशासन की फजीहत हुई तो मामले में पथलगड़ी / PLFI उग्रवादी संगठन और चर्च से जुड़े लोगों को जिम्मेदार बताया गया. इस गैंगरेप का आरोपी जॉन जुनास तिडू को बताया गया.

अभी घटना के कुछ ही दिन बीते थे. पुलिस ने 2 मुख्य आरोपी और एक फादर को गिरफ्तार कर लिया. इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि गैंगरेप का कथित मास्टर माइंड जॉन जुनास तिडू 26 जून को खूंटी थाना क्षेत्र के घाघरा में पथलगड़ी के कार्यक्रम में शामिल होने वाला है. एक दिन पहले से ही पुलिस ने जॉन जुनास तिडू को गिरफ्तार करने की रणनीति बनाने में जुटी. तय कार्यक्रम के अनुसार 26 जून को दिन के 10 बजे से पथलगड़ी का कार्यक्रम पारंपरिक रीति रिवाज से शुरू हो गया.

पुलिस दल बल के साथ जॉन जुनास तिडू को गिरफ्तार करने पहुंची. लेकिन हज़ारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण घाघरा से लेकर अनिगड़ा तक करीब 4 किलोमीटर तक पुलिस को खदेड़ दिए. पुलिस जब सेफ जोन में आ गई तो पुलिस ने 26 जून को दिन के करीब 1 बजे लाठीचार्ज कर ग्रामीणों को खदेड़ा. पुलिस की लाठी खाकर गुस्साए ग्रामीण/पथलगड़ी समर्थकों ने रास्ते मे पड़ने वाले खूंटी से बीजेपी के सांसद करिया मुंडा के घर पर हमला बोल दिया. घर की सुरक्षा में तैनात हवलदार बैजू उरांव के अनुसार करीब 300 की संख्या में पहुंची भीड़ 3 हाउस गार्ड उनकी इंसास राइफल के साथ उठाकर ले गए. सांसद के घर से 3 हाउस गार्ड को ले जाने के करीब 3 घंटे बाद पुलिस करिया मुंडा के घर पहुंची और आगे की रणनीति तैयार की.

खूंटी (सन्नी शरद): झारखंड का एक जिला खूंटी इनदिनों देशभर में सुर्ख़ियों में है. खूंटी पहले नक्सलवाद के मामले में देश में पहले पायदान पर था तो फिर पथलगड़ी और बैंक ऑफ ग्राम सभा को खोलकर सुर्खियों में आया. इतना कुछ तो था ही लेकिन 19 जून को अड़की थाना क्षेत्र के कोचांग में 5 आदिवासी युवतियों के साथ हुए गैंगरेप के बाद खूंटी अंतराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है. सरकार और प्रशासन की फजीहत हुई तो मामले में पथलगड़ी / PLFI उग्रवादी संगठन और चर्च से जुड़े लोगों को जिम्मेदार बताया गया. इस गैंगरेप का आरोपी जॉन जुनास तिडू को बताया गया.

अभी घटना के कुछ ही दिन बीते थे. पुलिस ने 2 मुख्य आरोपी और एक फादर को गिरफ्तार कर लिया. इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि गैंगरेप का कथित मास्टर माइंड जॉन जुनास तिडू 26 जून को खूंटी थाना क्षेत्र के घाघरा में पथलगड़ी के कार्यक्रम में शामिल होने वाला है. एक दिन पहले से ही पुलिस ने जॉन जुनास तिडू को गिरफ्तार करने की रणनीति बनाने में जुटी. तय कार्यक्रम के अनुसार 26 जून को दिन के 10 बजे से पथलगड़ी का कार्यक्रम पारंपरिक रीति रिवाज से शुरू हो गया.

पुलिस दल बल के साथ जॉन जुनास तिडू को गिरफ्तार करने पहुंची. लेकिन हज़ारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण घाघरा से लेकर अनिगड़ा तक करीब 4 किलोमीटर तक पुलिस को खदेड़ दिए. पुलिस जब सेफ जोन में आ गई तो पुलिस ने 26 जून को दिन के करीब 1 बजे लाठीचार्ज कर ग्रामीणों को खदेड़ा. पुलिस की लाठी खाकर गुस्साए ग्रामीण/पथलगड़ी समर्थकों ने रास्ते मे पड़ने वाले खूंटी से बीजेपी के सांसद करिया मुंडा के घर पर हमला बोल दिया. घर की सुरक्षा में तैनात हवलदार बैजू उरांव के अनुसार करीब 300 की संख्या में पहुंची भीड़ 3 हाउस गार्ड उनकी इंसास राइफल के साथ उठाकर ले गए. सांसद के घर से 3 हाउस गार्ड को ले जाने के करीब 3 घंटे बाद पुलिस करिया मुंडा के घर पहुंची और आगे की रणनीति तैयार की.

पुलिस को सूचना मिली कि तीनों अप्रहित जवानों को घाघरा के उसी गांव में रखा गया है जहां पथलगड़ी के वक्त ग्राम सभा लगी थी.

डर, दहशत और पुलिसिया कार्रवाई के 30 घंटे
26 जून को शाम करीब 5 बजे खूंटी डीसी सूरज कुमार और एसपी अश्वनी सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस भारी संख्या में फोर्स के साथ घाघरा गांव की ओर कूच करती है. गांव के मुहाने पर ही पत्थर की चट्टान पर हरे रंग से संविधान की व्याख्या लिखी हुई थी. जिसके अनुसार बिना ग्राम सभा की इजाजत के आप गांव में प्रवेश नहीं कर सकते हैं. वहां से करीब 1 किलोमीटर आगे चलने पर सामने लाठी डंडे के साथ लाल साड़ी में कुछ महिलाएं दिखती है. तभी माइक से अनाउंस होता है कि आप सभी अनुसूचित क्षेत्र में बिना ग्राम सभा की इजाजत के प्रवेश किये हैं इसलिए जहां हैं वहीं रुक जाइये.

मोर्चे में सबसे आगे चल रहे डीसी एसपी और तमाम डीएसपी अपने सैकड़ों जवानों को अपने जगह पर रुकने का आदेश दे देते हैं. और पुलिस माइक से अनाउंस करती है कि वो अपने तीन साथी को छुड़ाने आई है उसे छोड़ दें नहीं तो पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी. फिर पथलगड़ी समर्थकों की तरफ से घोषणा होती है कि ग्राम सभा इजाजत देती है कि 5 पुलिस के लोग ग्राम सभा में वार्ता के लिए आएं. पुलिस उसपर तैयार नहीं होती और फिर पुलिस घोषणा करती है कि पुलिस नहीं जाएगी आप लोग यहां आइये यहीं वार्ता होगी. तब तक 7 बज चुके थे. पूरी तरह से चारो तरफ अंधेरा छाया हुआ था. पथलगड़ी समर्थक तैयार नहीं होते और पुलिस को पीछे हटने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि ग्राम सभा रात को नहीं बैठती.

रात जैसे- जैसे बीत रही थी वैसे-वैसे सबकी बेचैनी बढ़ रही थी. सभी अधिकारी और जवान जंगल मे जमीन पर ही बैठ गए. रात करीब 10 बजे सभी जवानों के लिए खाना आया. जेनरेटर की व्यवस्था हुई. डीसी एसपी ने वहीं सड़क पर रात बिता दी. तो 100 मीटर की दूरी पर पथलगड़ी समर्थक हज़ारों की संख्या में डटे रहे. जिनके कब्जे में तीनो जवान थे. रात हो जाने और पुलिस बल की संख्या कम होने की वजह से पुलिस ने रात को कोई कार्रवाई नहीं की.

27 जून को सुबह करीब 7.30 बजे RAF के जवान वज्र वाहन के साथ पहुंचे. 8 बजे पुलिस ने एक बार फिर पथलगड़ी समर्थकों से पुलिस बात करनी चाही लेकिन पथलगड़ी समर्थक 5 लोगों को ग्राम सभा में आने पर ही बात करने को तैयार थे. पुलिस ने लाल कपड़ा दिखाकर कार्रवाई की चेतावनी दी. तब तक एक बार फिर सैकड़ों महिलाएं पुलिस के नजदीक आ चुकी थी. RAF के जवानों और महिलाओं में बात से ही मामला गर्म होता चला गया और महिलाओं की ओर से तीर चला दिया गया. उसके बाद पुलिस अांसू गैस के गोले और रबर बुलेट दागते हुए आगे बढ़ गई. बल प्रयोग किया गया. जिसमें गांव में भगदड़ की स्थिति बन गई. गांव वाले की ओर से भी लगातार तीर चलाये जा रहे थे. इसी दौरान कई लोग घायल भी हुए. जिसमें से एक शख्स की मौत हो गई. जिसकी पहचान अबतक नहीं हो पाई है. उसके बाद करीब 100 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

हिरासत में लिए गए लोगों ने बताया कि वे लोग दूसरे गांव के हैं और उन्हें पथलगड़ी में ग्राम सभा के नाम पर बुलाया गया था. गांव वालों ने चौकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि पथलगड़ी में शामिल नहीं होने पर ग्राम सभा की ओर से 500 रुपये जुर्माना लगाया जाता है. इसलिए उन्हें आना पड़ता है. अगवा जवानों के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि सुबह 4 बजे तक जवानों को गांव के स्कूल में ही बांधकर रखा गया था. लेकिन अभी कहां है ये उन्हें नहीं पता.

एक तरफ ग्रामीणों से पूछताछ हो रही थी तो दूसरी तरफ पुलिस हर एक घर की तलाशी ले रही थी. जिस घर के बाहर ताला लटका हुआ था उसमें भी कई लोग छुपे हुए मिले. लेकिन पूरे गांव की तलाशी के बाद भी अगवा जवानों का कोई सुराग नहीं मिला. दोपहर करीब 2 बजे आईजी नवीन कुमार सिंह और डीआईजी अमोल वी होमकर पहुंचे. उन्होंने भी अपने स्तर से गांव की तलाशी कार्रवाई लेकिन तीनों जवानों का सुराग नहीं मिला.

दरअसल जिस तरफ से पुलिस ने धावा बोला उसके ठीक विपरीत ओर से एक रास्ता साइको और चाईबासा जिला की ओर जाता है. पक्की सड़क भी है. उधर से हो सकता  है जवानों को गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया हो. क्योंकि उस तरफ कोई पुलिस की तैनाती नहीं थी. जिसे पुलिसिया चूक भी बताया जा रहा है.

शाम 4 बजे पुलिस ने अपनी रणनीति बदली. आईजी, डीआईजी और डीसी ने बैठक कर तय किया कि घाघरा गांव के आसपास के दर्जनों गांव में तलाशी अभियान चलाया जाएगा. इसके लिए कुछ देर के लिए सर्च ऑपरेशन को रोका भी गया. क्योंकि पिछले 24 घंटे से जो जवान तैनात थे उन्हें बदला गया और उनके जगह नए जवानों को लगाया गया.

घटना के लगभग 30 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अबतक अगवा जवानों का कोई सुराग नहीं मिला है. आईजी नवीन कुमार सिंह के अनुसार 20 बटालियन पुलिस फोर्स को अगवा जवानों को खोजने में लगाया गया है. जिसमें झारखंड पुलिस, जगुआर, CRPF और RAF के जवान शामिल हैं. आईजी नवीन कुमार सिंह ने कहा कि अगवा जवानों की सकुशल वापसी उनकी प्राथमिकता है. लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा भी उनके लिए मायने रखता है. आईजी ने कहा है कि वे अपहरणकर्ताओं से वार्ता को तैयार हैं.

क्या है पथलगड़ी? 
दरअसल पथलगड़ी आदिवासियों की पारंपरिक रीति-रिवाज का हिस्सा है. जन्म से लेकर किसी खास प्रयोजन में पथल पर शब्द खुदवाकर यादगार बनाया जाता है. लेकिन हाल के दिनों में खूंटी में कुछ लोगों ने खुद की राजनीति साधने के लिए इसका गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया है. और इसका मास्टर माइंड यूसुफ फुर्ती नाम का शख्स माना जा रहा है. जो अबतक फरार है. ये लोग पत्थर के चट्टान पर पांचवी अनुसूची का हवाला देकर संविधान की गलत व्याख्या करते हैं और भोले भाले ग्रामीण को बरगला रहे हैं. इनके अनुसार जिस इलाके में पथलगड़ी हो गई उस इलाके में राष्ट्रपति भी ग्राम सभा की इजाजत के बिना प्रवेश नहीं कर सकते. इसी के उलंघन में दो बार खूंटी के डीसी एसपी को भी ग्रामीणों ने बंधक बनाया है.

नक्सलवाद के नाम पहले से बदनाम खूंटी में अब आलम ये है कि लोग खूंटी जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर अंदर जाने से पहले सौ बार सोचते हैं. पुलिस और ग्रामीणों के बीच की स्थिति को देख कई लोग तो अब खूंटी को कश्मीर की संज्ञा देने लगे हैं.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here