भूमध्यसागर से बचाए गए 629 शरणार्थियों की जान पर आफत, माल्टा ने नहीं खोला अपना बंदरगाह

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रोम: माल्टा ने भूमध्यसागर से बचाए गए सैकड़ों शरणार्थियों को ले कर आ रहे एक बचाव पोत के लिए अपना बंदरगाह खोलने से सोमवार (11 जून) को इनकार कर दिया. गैर सरकारी संगठन के बचाव पोत एसओएस मैडिटेरनी ने रविवार (10 जून) को 629 शरणार्थियों की जान बचाई थी और फिलहाल ये लोग फ्रांसीसी एनजीओ के जहाज एक्वेरियस पर हैं. यह जहाज फिलहाल माल्टा और सिसली के बीच है और सुरक्षित बंदरगाह पर पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहा है.

इटली के गृह मंत्री माटियो साल्वनी और इटली तट रक्षा के प्रभारी मंत्री डानिलो टोनीनेली ने एक संयुक्त बयान देकर कहा कि मानव जीवन की रक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के सम्मान की बात करें तो माल्टा लगातार इससे मुंह नहीं मोड़ सकता. वहीं माल्टा की सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट ने इटली के प्रधानमंत्री गियुसेपे कोंटे से बात कि और कहा कि ‘माल्टा अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पूरा अनुपालन कर रहा है.”

इससे पहले भूमध्य सागर में 50 से ज्यादा शरणार्थी डूब गए थे. उनमें से अधिकतर ट्यूनीशिया और तुर्की के तट के पास डूबे थे. ट्यूनीशिया के अधिकारियों के मुताबिक, देश के दक्षिणी तट के पास से रविवार (3 जून) को 48 शव बरामद किए गए थे, जबकि 68 लोगों को सुरक्षित बचाया गया था. यह हिस्सा सफाक्स शहर के नजदीक है. हादसे में बचे ट्यूनीशिया के वाएल फरजानी ने बताया कि नौका की अधिकतम क्षमता 75 से 90 लोगों की थी, लेकिन उसमें 180 से ज्यादा लोग सवार थे. उन्होंने एएफपी को बताया कि नौका में पानी घुस गया और कुछ मुसाफिर समंदर में कूद गए और डूब गए.

ट्यूनीशिया के लोग और शरणार्थी नियमित तौर पर यूरोप में बेहतर भविष्य की तलाश के लिए भूमध्य सागर पार करने की कोशिश करते हैं. मार्च में 120 ट्यूनीशियाइयों को बचाया था. वे इटली पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. इटली के नए गृह मंत्री मटेओ साल्विनी ने वहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या घटाने और लोगों को देश से निकालने की प्रक्रिया में तेजी लाने का संकल्प लिया है. उन्होंने शनिवार (2 जून) को एक रैली में कहा कि अवैध आव्रजकों के अच्छे दिन खत्म हुए. अब वे अपना सामान बांध लें.

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