PAK: शाहरुख खान की रिश्तेदार को चुनाव आयोग ने दी राहत, निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव

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पेशावर: हिन्दी फिल्मों के अभिनेता शाहरुख खान की रिश्तेदार नूरजहां की उम्मीदवारी को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चुनाव आयोग ने मंजूरी दे दी है और अब वह 25 जुलाई को प्रस्तावित प्रांतीय विधानसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ेंगी. खान की रिश्तेदार नूरजहां पीके-77 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) ने टिकट नहीं दी थी जबकि वह जन्म से इस पार्टी से जुड़ी रही हैं. उन्होंने कहा कि उसके पूर्वज 1947 में बंटवारे के वक्त से एएनपी से जुड़े रहे हैं.

प्रांत के चुनाव आयोग ने पेशावर शहर की एक सामान्य सीट से प्रांतीय विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने हेतु उनका नामांकन पत्र स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा में सामान्य सीट और महिलाओं के लिए आरक्षित सीट दोनों के लिए एएनपी पार्टी की टिकट के लिए आवेदन दिया था लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिली.

इसलिए उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया. उन्होंने पाकिस्तान में उनके चुनाव में भाग लेने के कारण भारत में शाहरुख का आलोचना पर नाखुशी जताई. उन्होंने कहा, ‘‘हम जब भी फोन पर बात करते हैं तो हम फिल्मों और क्रिकेट की बात करते हैं, और कुछ नहीं.’’

नूरजहां अपने परिवार के साथ शाह वाली कटाल इलाके में रहती हैं
रिपोर्ट के अनुसार नूरजहां अपने परिवार के साथ शाह वाली कटाल इलाके में रहती हैं. दोनों परिवारों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं. शाहरुख खान ने दो बार नूरजहां से मुलाकात की है. एक बार 1978 में और दूसरी बार 1980 में. दूसरी यात्रा में शाहरुख खान ने पेशावर में एक माह से ज्यादा वक्त बिताया था.

नूरजहां ने कहा, “मेरा उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के लिए काम करना है. मैं अपने क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं.” नूरजहां के भाई मंसूर जो कि कैंपेन का नेतृत्व कर रहे हैं, का कहना है कि उनका परिवार खुदाई खिदमतगार आंदोलन का हिस्सा रहा है जिसे खान अब्दुल गफ्फार खां ने चलाया था.

उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बहन नूरजहां काउंसलर रह चुकी हैं. वह पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं. हालांकि वह आवामी नेशनल पार्टी से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने उम्मीद जताई है, “जिस तरह से लोग शाहरुख खान का समर्थन करते हैं, उसी तरह से वे मुझे भी समर्थन देंगे.” इस सीट पर पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता शौकत युसुफजई का कब्जा था. पिछले सप्ताह 28 मई को विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाने के कारण यह सीट खाली हो गई थी.

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