अपने साथ टॉयलेट लेकर सिंगापुर पहुंचा किम जोंग-उन, वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन की मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं. सिंगापुर में हुई इस मीटिंग में सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए गए थे. दोनों देशों ने भी अपनी ओर से सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी. लेकिन, फिर भी किम जोंग-उन की सुरक्षा अमेरिकी राष्ट्रपति से भी कड़ी थी. यहां तक की किम सिंगापुर कैसे पहुंचा यह भी किसी को नहीं पता. लेकिन, एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. अब इसे किम जोंग का डर कहें या फिर कुछ और, क्योंकि अपने साथ अपना पोर्टेबल टॉयलेट भी सिंगापुर लेकर पहुंचा. इसके पीछे भी एक खास वजह थी.

किम को ले जाने के लिए 3 विमानों ने भरी उड़ान
किम जोंग को सिंगापुर ले जाने के लिए उत्तर कोरिया से तीन अलग-अलग विमानों (IL76, एयर चाइना बोइंग 747 और इल्यूशिन IL62) ने एक-एक घंटे के अंतराल पर उड़ान भरी. लेकिन, किसी को भी इस बात की खबर नहीं थी कि किम जोंग किस विमान में हैं. किम जोंग की बहन यो-जोंग भी सोवियत-एरा के एक विमान में सिंगापुर पहुंचीं

पोर्टेबल टॉयलेट लेकर पहुंचा किम
उत्तर कोरिया के एक अधिकारी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच होने वाली बैठक को लेकर काफी तनाव था. इसलिए इस बात को पूरी तरह से गुप्त रखा गया कि किम जोंग किस विमान में हैं या वो कैसे सिंगापुर पहुंच रहे हैं. उत्तर कोरिया में भी इस बात की जानकारी कुछ ही लोगों को थी. पहला विमान किम जोंग लिए खाने-पीने की चीजें, बुलेट-प्रूफ लिमोजिन गाड़ी व पोर्टेबल टॉयलेट लेकर सिंगापुर पहुंचा.

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क्यों लाया गया पोर्टेबल टॉयलेट?
पोर्टेबल टॉयलेट इसलिए ले जाया गया था ताकि किम जोंग के स्टूल (मल) की किसी तरह के जांच न की जा सके या उस पर किसी तरह का परीक्षण न किया जा सके. इसके पीछे वजह है कि किम के स्वास्थ्य की जानकारी बिल्कुल बाहर नहीं आती. पहले भी चर्चा होती रही है कि किम को कई बीमारियां हैं. लेकिन, अब स्टूल की जांच होने के डर से साफ है कि उत्तर कोरिया नहीं चाहता कि किम के स्वास्थ्य की जानकारी किसी को भी लगे.

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किम की सुरक्षा में चीन का खर्च
सुरक्षा कारणों से किम जोंग ने शंघाई होकर सिंगापुर की यात्रा नहीं की, क्योंकि ये रास्ता समुद्र के ऊपर से होकर जाता है जिससे सुरक्षा करने में दिक्कत होती है. इसके बजाय किम ने बीजिंग होकर सिंगापुर की यात्रा की, जिसमे 10 घंटे लगे और खर्च भी काफी हुआ. चीन के एविएशन सोर्सेज ने दक्षिण कोरिया की समाचार डेली ‘चोशुन इल्बो’ को बताया कि किम को एयरक्राफ्ट लोन पर देना दिखाता है कि चीन के ऊपर काफी राजनीतिक दबाव था और इसकी वजह से चीन को भारी खर्च भी करना पड़ा.

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उत्तर कोरिया को उधार नहीं मिलता
आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिज़ोल्यूशन 2270 के तहत उत्तर कोरिया को किसी भी तरह का एयरक्राफ्ट, शिप व क्रू उधार देने पर रोक है लेकिन मौजूदा परिस्थिति देखने से साफ होता है कि शायद चीन को संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी मिल गई थी.

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