वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के सम्मान में ब्रिटेन ने शुरू की Fellowship, इन छात्रों को मिलेगा फायदा

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लंदन: ब्रिटेन की सरकार ने स्टीफन हॉकिंग के सम्मान में गणित, भौतिकी और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्रों में पीएचडी के 10 असाधारण छात्रों को फेलोशिप देने की 11 जून(सोमवार) को घोषणा की. ब्रिटिश सरकार ने अपने इस कदम को महान भौतिकविज्ञानी को एक श्रद्धांजलि बताया है. गौरतलब है कि हॉकिंग का 14 मार्च को 76 वर्ष की आयु में कैम्ब्रिज स्थित अपने आवास में निधन हो गया था.

यूके रिसर्च एंड इनोवेशन अगले पांच साल तक हर साल 10 ‘ स्टीफन हॉकिंग फेलोशिप ’ देगी. व्यापार , ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति विभाग ने कहा कि गणित , भौतिकी और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पीएचडी के छात्रों को यह फेलोशिप दी जाएगी. विज्ञान मंत्री सैम गीमाह ने कहा, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हॉकिंग के परिवार के साथ चर्चा के बाद हम उनकी याद में हॉकिंग फेलोशिप शुरू कर रहे हैं.’’

जब स्टीफन हॉकिंग के PhD रिसर्च ने सबसे ज्‍यादा देखे जाने का बनाया रिकॉर्ड
महान वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग अपने जीवनकाल में ही इतने मशहूर हो गए थे कि माना जाता है कि अल्‍बर्ट आइंसटीन के बाद उनको सबसे ज्‍यादा शोहरत मिली. उनके प्रति लोगों में दिलचस्‍पी को महज इस बात से समझा जा सकता है कि पिछले साल अक्‍टूबर में ब्रिटिश भौतिक शास्त्री और ब्रह्मांड विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के पीएचडी शोधपत्र को सार्वजनिक किए जाने के कुछ ही दिनों में दुनिया भर में 20 लाख से ज्यादा लोगों ने उसे देखा.

हॉकिंग का 1966 में किया गया यह शोध कार्य इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे जारी करते ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की वेबसाइट का प्रकाशन अनुभाग क्रैश हो गया. हॉकिंग ने अपनी थीसिस 1966 में ‘प्रॉपर्टीज ऑफ एक्‍सपैंडिंग यूनिवर्सेज’ लिखी थी, जब वे 24 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट ही थे. करीब पांच लाख से ज्यादा लोगों ने ‘ब्रह्माण्डों के विस्तार के लक्षण’ शीर्षक वाले पृष्ठ को डाउनलोड करने का प्रयास किया. विश्वविद्यालय के आर्थर स्मिथ ने इन आंकड़ों को ‘अद्वितीय’ बताया.

थीसिस का सार
स्‍टीफन हॉकिंग ने इसे यह कहते हुए उपलब्ध कराया था कि उन्हें उम्मीद है कि यह लोगों को प्ररित करेगी. उन्होंने कहा, “किसी को भी दुनिया में कहीं से भी, सिर्फ मेरी रिसर्च ही नहीं बल्कि अब तक की मानवता के प्रत्येक महान और उत्सुक मस्तिष्क की रिसर्च बिना किसी बाधा के उपलब्ध होनी चाहिए. यह सुनकर अच्छा लगता है कि कितने सारे लोगों ने मेरी थीसिस को डाउनलोड करने में दिलचस्पी दिखाई और अब उनके पास पहुंच है तो वे निराश नहीं हुए होंगे.”

इससे पहले लोगों को हॉकिंग की थीसिस स्कैन करने या खुद जाकर पढ़ने के लिए यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी को 65 पाउंड की राशि देनी पड़ती थी. 134 पेज के इस कार्य की लोकप्रियता के चलते यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को यूजर्स की संख्या को संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. थीसिस के सार की शुरुआत इन शब्दों से होती है, ‘ब्रह्मांड के विस्तार के आशय और प्रभाव का परीक्षण..’

 दुनिया को ब्लैक होल की थ्योरी समझाने वाले महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का निधन

इस संबंध में संचार विभाग के उप प्रमुख स्मिथ ने मीडिया को बताया था, “स्मिथ का शोधपत्र अपोलो रिपॉजिटरी विश्वविद्यालय की अब तक की सबसे अधिक देखी जाने वाली सामग्री बन गई है. ” उन्होंने कहा, “अनुमान के मुताबिक, प्रोफेसर हॉकिंग का पीएचडी शोधलेख किसी भी रिसर्च रिपॉजिटरी से सबसे अधिक देखा जाने वाला शोधलेख है. हमने पहले कभी ऐसे आंकड़े नहीं देखे हैं.”

उल्‍लेखनीय है कि विख्यात ब्रिटिश भौतिकविद् और कॉस्मोलॉजिस्ट स्टीफन हॉकिंग का 76 की उम्र में 14 मार्च को निधन हो गया है. परिवार ने इसकी पुष्टि की है. स्टीफन के बच्चे लूसी, रॉबर्ट और टिम ने एक बयान में कहा, ”हम अपने पिता की मृत्यु से बेहद दुखी हैं. वे एक महान वैज्ञानिक होने के साथ ही शानदार व्यक्ति थे. उनके कार्य और विरासत हमेशा जिंदा रहेंगे. वे लोगों को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे. हम उन्हें बहुत मिस करेंगे.”

‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ ने मचाया तहलका
स्‍टीफन हॉकिंग का जन्‍म आठ जनवरी, 1942 को इंग्‍लैंड के ऑक्‍सफोर्ड में हुआ था. वह भौतिक विज्ञानी, ब्रह्मांड विज्ञानी और लेखक थे. वह यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के सेंटर फॉर थियोरेटिकल कॉस्‍मोलॉजी के रिसर्च विभाग के डायरेक्‍टर भी थे. उन्‍होंने हॉकिंग रेडिएशन, पेनरोज-हॉकिंग थियोरम्‍स, बेकेस्‍टीन-हॉकिंग फॉर्मूला, हॉकिंग एनर्जी समेत कई अहम सिद्धांत दुनिया को दिए. उनके कार्य कई रिसर्च का बेस बने. स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया है.

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