15 साल की हंसिका ने पढ़ने के लिए किया शादी से इंकार, सम्मानित करेगी बिहार सरकार

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पटना: कम उम्र में मां-बाप अक्सर अपनी बेटियों की शादी कर देते हैं और जिसके बाद अक्सर उनकी पढ़ाई छूट जाती है. लेकिन ये सच है कि अगर पढ़ने और कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कोई भी राह में रोड़ा नहीं बन सकता है.

कुछ ऐसा ही कर दिखाया बिहार के बिहटा की रहने वाली हंसिका ने. 15 वर्षीय हंसिका के माता-पिता ने शादी तय कर दी थी और 20 जुलाई को शादी भी होने वाली थी लेकिन हंसिका को शादी करना मंजूर नहीं था. कारण था कि हंसिका पढ़ना चाहती थी और पुलिस ऑफिसर बनना चाहती है इसलिए वो  इस शादी के खिलाफ थी.

घर आए लड़के पक्ष को हंसिका ने वापस लौटा दिया और बाल विवाह का विरोध भी किया. दरअसल हंसिका बिहटा के श्रीरामपुर की रहने वाली है और हंसिका के परिवार की आर्थिक अच्छी नहीं है. हंसिका की पांच बहनें और एक भाई है. खुद हंसिका अपने नानी घर में रहकर पढ़ाई करती थी.

दरअसल हंसिका को पहले माता-पिता ने पहले उसे नानी घर से बुलया और बिहटा के सरकारी स्कूल राजकीय मध्य विद्यालय में दाखिला करा दिया. फिर बिना उसे बताए उसकी शादी तय कर दी. 20 जुलाई को भोजपुर के बखोरापुर स्थित माता मंदिर में हंसिका की शादी तय थी लेकिन लगन पान लेकर आए वर पक्ष को हंसिका ने लौटा दिया और कहा कि वो अभी शादी नहीं करेगी. वो अभी आगे पढ़ना चाहती है और पुलिस में जाकर देश की सेवा करना चाहती है.

इतना के बाद भी जब मां-बाप नहीं माने तो हंसिका बिहटा थाने पहुंची अपने मां-बाप के खिलाफ पुलिस में शिकायत की. पुलिस ने भी उसकी बात को गंभीरता से लेते हुए उसके साथ उसके घर गई और माता-पिता को समझाया कि उसे पढ़ने दें. आखिरकार मां-बाप ने भी पुलिस की बात मानी और शादी तोड़ दी.

हंसिका के इस बहादुरी भरे कदम की बिहार सरकार ने भी सराहना की है और हंसिका को इसके लिए सम्मानित भी करना चाहती है. महिला विकास निगम की प्रबंधन निदेशक डॉ एन विजयालक्ष्मी ने की है राज्य सरकार हंसिका को बाल विवाह निषेध कानून का अंबेसडर बनाएगी.  वहीं,  शिक्षा विभाग भी हंसिका को सम्मानित करेगा. शित्रा मंत्री कृष्णनन्दन वर्मा ने हंसिका की तारीफ करते हुए कहा कि हंसिका ने वैसे अभिभावकों को संदेश दिया है जो छोटी उम्र में अपने बच्चियों के हांथ पीले करना चाहते हैं.

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