राजस्थान में दूध से महंगा बिक रहा गोमूत्र, 30 रुपए/लीटर पहुंचे दाम, क्या है वजह?

0
153

नई दिल्ली: सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि गोमूत्र भी इन दिनों राजस्थान के किसानों की आमदनी का बड़ा साधन बन गया है. राजस्थान में गोमूत्र की अचानक इतनी डिमांड बढ़ गई है कि किसान हाई ब्रिड गाय जैसे गिर और थरपार्कर का गोमूत्र थोक बाजार में 15 से 30 रुपए प्रति लीटर तक बेच रहे हैं. वहीं, गाय का दूध का रेट 22 रुपए से लेकर 25 रुपए प्रति लीटर तक है. आलम यह है कि दूध से महंगा गोमूत्र बिक रहा है. यही वजह है कि राज्य के किसान अचानक मालामाल हो गए हैं. कई इलाकों में किसानों की आय में 30 फीसदी से ज्यादा इजाफा देखने को मिला है.

बताया जा रहा है कि राजस्थान में गाय की गिर और थरपारकर जैसी कुछ प्रजातियों के गोमूत्र की डिमांड काफी है. एक ओर जहां किसानों को गाय के दूध के लिए 22-25 रुपए तक ही मिल पाते हैं, वहीं गोमूत्र के लिए प्रति लीटर 15-30 रुपए का दाम आसानी से मिल जाता है.

खाद और दवाओं में होता है इस्तेमाल
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, जयपुर के रहने वाले किसान कैलाश गुर्जर बताते हैं कि गोमूत्र का इस्तेमाल जैविक कृषि के लिए होता है. इस क्षेत्र में काम करने वाले तमाम लोग उनसे गोमूत्र खरीदते हैं और इसी कारण उनकी आय में करीब 30 फीसदी का इजाफा भी हुआ है. कैलाश के मुताबिक, गोमूत्र का इस्तेमाल केमिकल युक्त खाद के एक विकल्प के रूप में होता है. इसके अलावा, दवा और तमाम धार्मिक कामों में भी इसका इस्तेमाल होता है. कैलाश कहते हैं कि गोमूत्र को इकट्ठा करने के लिए उन्हें सारी रात जागना पड़ता है.

खुले में 50 रुपए प्रति लीटर बिक रहा गोमूत्र
राजस्थान के दूध विक्रेता ओम प्रकाश मीणा के मुताबिक, उन्होंने जयपुर में गिर गायों की गौशाला से गोमूत्र खरीदना शुरू किया है. मीणा का कहना है कि आम बाजार में जैविक कृषि या अन्य कामों को लिए गोमूत्र को 30 से 50 रुपए प्रति लीटर की कीमत में बेचा जा रहा है और इससे किसानों की आय में अच्छा इजाफा भी देखने को मिल रहा है. मीणा का कहना है कि गोमूत्र से जैविक कृषि के क्षेत्र में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है. मीणा के मुताबिक, बहुत से लोग गोमूत्र को धार्मिक कामों में इस्तेमाल करते हैं. यज्ञ और जनेऊ संस्कार में इसका उपयोग सबसे ज्यादा है.

कृषि विश्वविद्यालय भी करता है गोमूत्र की खरीद 
राजस्थान सरकार के अधीन आने वाली उदयपुर की महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रद्यौगिकी विश्वविद्यालय भी अपने ऑर्गेनिक फॉर्मिंग प्रोजेक्ट के लिए हर महीने करीब 350 से 500 लीटर गोमूत्र खरीदती है. गोमूत्र की इस खरीद के लिए विश्वविद्यालय ने राज्य की कई गौशालाओं से अनुबंध भी किया है. हर महीने करीब 15000-20000 रुपए का गोमूत्र खरीदा जाता है. विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर उमा शंकर के मुताबिक, गोमूत्र किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक साधन है.

2562 गोशाला चलाती है सरकार
राज्य सरकार में गौपालन मंत्रालय के मंत्री ओता राम देवासी के मुताबिक, राजस्थान में 2562 गोशाला में करीब 8 लाख 58 हजार 960 गाय हैं. किसानों की आय बढ़ने के लिए राज्य सरकार गायों के संरक्षण के लिए काम कर रही है. इसके लिए राज्य की 2562 गोशालाओं में साढ़े आठ लाख से अधिक गायों का संरक्षण भी किया जा रहा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here