विकलांग जवानों और शहीदों के परिवार के लिए उम्‍मीद की नई किरण बना भारतीय सेना का वैटरन्‍स निदेशालय

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नई दिल्‍ली: भारतीय सेना का जिक्र आते ही अक्‍सर दो तरह की तस्‍वीरें नजर आती हैं. पहली तस्‍वीर, भारतीय सेना के जवानों की अकल्‍पनीय शौर्य गाथा से जुड़ी होती हैं, वहीं दूसरी तस्‍वीर युद्ध या किसी ऑपरेशन में दिव्‍यांग हुए जवानों की बदहाली की दास्‍तां बयान करती हैं. भारतीय सेना से सेवानिवृत्‍त हुए जवानों की बदहाली को बयां करने वाली इन तस्‍वीरों को देखने के बाद हर किसी के जहन में एक सवाल कौंधता है कि क्‍या भारतीय सेना दिव्‍यांग हुए हमारे वीरों को ऐसे ही बेसहारा छोड़ देती है?

इस सवाल का सही जवाब तलाशने के लिए हमने भारतीय सेना के वरिष्‍ठ अधिकारियों से संपर्क किया. इस संपर्क के दौरान हमने यह जानने की कोशिश की, कि युद्ध या ऑपरेशन के दौरान दिव्‍यांग होने वाले जवानों के भविष्‍य को भारतीय सेना किस तरह सुरक्षित करती है. सेना से मिले जवाबों से साफ था कि कारगिल दिवस के दौरान दिखाई गई इस तरह की तस्‍वीरें सच्‍चाई से कोसों दूर हैं. सच्‍चाई यह है कि युद्ध या किसी ऑपरेशन में दिव्‍यांग हुए जवान और उनके परिजनों की देखरेख के लिए सेना में एक अलग निदेशालय का गठन कर रखा है. इस निदेशालय को इंडियन आर्मी वैटरन्‍स निदेशालय के नाम से पहचाना जाता है.

भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल स्‍तर के अधिकारी के अधीन कार्य करने वाला यह निदेशालय न केवल दिव्‍यांग हुए सैनिक बल्कि शहीद हुए जवानों की वीरनारी (विधवा) और उनके बच्‍चों की देखरेख भी करती है. यह निदेशालय दिव्‍यांग या शहीद हुए जवानों के परिजनों की देखरेख के साथ साथ बच्‍चों की पढ़ाई और बच्चियों की शादी जैसे मौकों पर भी आर्थिक मदद उपलब्‍ध कराता है.

आइए जानते हैं क्‍या है भारतीय सेना का वैटरन्‍स निदेशालय और इसके अंतर्गत कौन-कौन सी योजनाएं चलती हैं.
कभी सिर्फ सेवानिवृत्‍त जवानों की पेंशन को लेकर काम करने वाले वैटरन्‍स सेल का विस्‍तार करके व्‍यापक जिम्‍मेदारियों के साथ एक निदेशालय बना दिया गया है. यह निदेशालय सेवानिवृत्‍त जवानों और वीर नारी के लिए एकल बिंदु संपर्क का काम करता है. इतना ही नहीं, यह निदेशालय नेशनल स्किल डेवलपमेंट स्‍कीम के जरिए भावी सेवानिवृत्त सैनिक, वीरनारी और उसने आश्रतों के लिए कई ट्रेनिंग प्रोगाम भी चलता है. जिससे भविष्‍य में उन्‍हें रोजगार के बेहतर अवसर के साथ सम्‍मानपूर्ण जीवन का रास्‍ता मिल सके. इसके अलावा, इस निदेशालय के अंतर्गत चलने वाली डिसेबल केयर एण्‍ड सपोर्ट सर्विस के तहत युद्ध या मिलिट्री ऑपरेशन में दिव्‍यांग हुए जवानों को मोबिलिटी उपकरण तथा आर्थिक सहायता मुहैया कराया जाता है.

निदेशालय के प्रयास से 40,000 वैटरन्‍स को मिला रोजगार प्रशिक्षण
निदेशालय में तैनात कर्नल दीपक कुमार के अनुसार, भारतीय सेना का प्रयास है कि जवानों के रिटायर होने के बाद उन्‍हें रोजगार का दूसरे अवसर भी उपलब्‍ध कराए जाएं. इसी कवायद के तहत वैटरन्‍स निदेशालय ने मिनिस्‍ट्री आफ स्किल डेवलपमेंट की मदद से सभी कैंपस में नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू किए थे. 2017 में निदेशालय के जरिए करीब 40 हजार सेवानिवृत्‍त सैन्‍य कर्मियों को न केवल प्रशिक्षण दिलाया गया बल्कि उन्‍हें दूसरे रोजगार के लिए परिशिक्षित किया गया. इसके अलावा, इन ट्रेनिंग सेंटर में वीर नारी और शहीद जवानों के बच्‍चों के प्रशिक्षण के लिए भी कोर्स तैयार किए गए हैं. जिससे, वह अपने जीवन की नई दिशा निधार्रित कर सकें. इन सेंटर्स में दिए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नेशनल स्किल क्‍वालिफिकेशन फ्रेमवर्क से प्रमाणित भी किया गया है.

वैटरन्‍स की आर्थिक मदद भी जारी करता है यह निदेशालय
सैन्‍य ऑपरेशन में विकलांग होने वाले जवानों की मदद के लिए निदेशालय ने व्‍यापक स्‍तर पर प्रावधान किए हैं. ये प्रावधान किसी भी विकलांग वैटरन्‍स की व्‍यक्ति जीवन को बेहतर करने में मदद करता है बल्कि बेटी की शादी और बच्‍चों की शिक्षा के लिए भी आर्थिक मदद उपलब्‍ध कराता है. वैटरन्‍स निदेशालय के अनुसार 1 जनवरी 2016 के बाद विक्‍लांग हुए सैनिकों को 2 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है.

इसके अलावा, विभिन्‍न आर्थिक प्रावधानों के साथ निदेशालय सैन्‍य ऑपरेशन में जान गवाने अथवा विकलांग हुए सैनिक, सेवा काल में जान गवाने वाले सैनिक ;बैटल कसुअलटी (फेटल/डिसेबल्ड) और फिजिकल कसुअलटी की बेटी, सेवा काल के दौरान अनाथ हुए पुत्र (जिनकी माता जी भी गुजर गयी हैं) और वीरनारी के पुर्नविवाह के लिए 1लाख रुपय की आर्थिक मदद देता है. इसके अलावा, बच्‍चों के पढ़ाई के लिए निदेशालय प्रतिवर्ष 50 हजार रुपए तक की छात्रवृत्ति भी देता है.

2018 को ईयर ऑफ़ डिसेबल्ड सोल्जर इन लाइन ऑफ़ ड्यूटी घोषित किया गया
भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल पद पर तैनात लेफ्टिनेंट जनरल अश्‍वनी कुमार के अनुसार, वेटरन्स और वीर नारी सेना के एक अभिन्न हिस्सा हैं. सरकार और सेना पूरी तरह से उनके कल्याण और समर्थन के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्‍होंने बताया कि भारतीय सेना ने देश की सेवा करते विकलांग हुए सैनिकों को सम्मानित करने के लिए साल 2018 को ईयर ऑफ़ डिसेबल्ड सोल्जर इन लाइन ऑफ़ ड्यूटी घोषित किया है.

भारतीय सेना ने विभिन्न स्तरों पर वेटरन्स वर्टिकल बनाया है. हर सैन्य स्टेशन पर एक वेटरन्स सहयाता केंद्र है. राज्य स्तर पर हमारे सभी सब एरिया और एरिया में कर्नल (वेटरन्स ) पोस्टेड हैं. वेटरन्स और वीर नारी से संबंधित कोई भी समस्या के निवारण के लिए भारतीय सेना वेटेरन निदेशालय (DIAV) का गठन 14 जनवरी 2016 को किया गया .इन सब प्रयासों की वजह से हम देश के दूर दराज इलाकों में भी अपने पूर्व सैनिकों और वीर नारी से जुड़े रहते है.

सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए रेजिमेंट सेंटर में चल रहे हैं NSDC प्रमाणित स्किलिंग पाठ्यक्रम
लेफ्टिनेंट जनरल अश्‍वनी कुमार ने बताया कि DIAV का नेतृत्व एक ब्रिगेडियर रैंक अधिकारी करता है जो सीधे एडजुटेंट जनरल के अधीन काम करता है. सरकार और भारतीय सेना वीर नारी और वेटरन्स  के लिए कई योजनाएं चला रही है .इन योजनाओं का विवरण हमारी वेबसाइटों पर उपलब्ध है.

हम अपने सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए रेजिमेंट सेंटर में NSDC प्रमाणित स्किलिंग पाठ्यक्रम चला रहे हैं. अब तक हमने 40,000 से अधिक सैनिकों को प्रशिक्षित किया है. हम नौकरियां प्रदान करने में भी अपने पूर्व सैनिकों की सहायता करते है . वीर नारी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए  सेना ने  22 स्थानों पर आर्मी स्किल ट्रेनिंग सेंटर ASTC की स्थापना की है . अब तक 3000 से अधिक वीर नारी को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

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