लाल बहादुर शास्त्री की मौत के वक्त उनके साथ थे कुलदीप नैयर, जानें 5 बातें

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नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है. उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली. कुलदीप नैयर देश के उन गिने-चुने पत्रकारों में से एक रहे जिनका संबंध सीधे-सीधे भारत सरकार से रहा. ये ऐसे पत्रकार रहे जिनकी लेखनी का असर सरकारों पर पड़ता रहा. इन्होंने भारत सरकार की कार्यप्रणाली और समसामयिक राजनीतिक घटनाक्रम पर कई किताबें लिखी हैं. नैयर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेहद करीब माने जाते थे. आइए इस बड़े पत्रकार की जिंदगी से जुड़े कुछ बातें जानते हैं.

1. कुलदीप नैयर मूल रूप से सियालकोट के रहने वाले थे, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है. 14 अगस्त 1924 को जन्में कुलदीप नैयर ने लाहौर के कॉलेज से ही लॉ की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने दर्शनशास्त्र में पीएचडी भी की थी. बाद में उन्होंने अमेरिका में पत्रकारिता की पढ़ाई की थी.

2. 1947 में देश का बंटवारा होने के बाद कुलदीप नैयर ने भारत में ही रहने का फैसला लिया था. उन्होंने भारत के कई बड़े अखबारों में लंबे समय तक कार्य किया था.

3. कुलदीप नैयर अंतरराष्ट्रीय पत्रकारा माने जाते रहे. वे करीब 25 साल तक ‘द टाइम्स लंदन’ में रिपोर्टर के तौर पर कार्य किया था. भारत में उन्होंने न्यूज एजेंसी यूएनइआई, पीआईबी, अंग्रेजी अखबार ‘द स्टैट्समैन’ और ‘इण्डियन एक्सप्रेस’ में लंबे समय तक सेवाएं दी

4. माना जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की असामयिक मौत का सच केवल कुलदीप नैयर को पता था. दरअसल, साल 1966 में भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भारतीय उपमहाद्वीप में शांति का भरोसा था इसलिए उन्होंने ताशकंद में पाकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन उसी दिन उनकी रहस्यमय परिस्थियों में मौत हो गई। शास्त्री की मौत के वक्त उनके सबसे करीब कुलदीप नैयर ही थे. उस वक्त कुलदीप नैयर उनके प्रेस सलाहकार थे. हालांकि कुलदीप नैयर ने इस मौत को लेकर खुलकर कभी कुछ नहीं कहा.

5. कुलदीप नैयर 1990 में ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त रहे. अगस्त 1997 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था. कुलदीप नैयर ने ‘बिटवीन द लाइन्स’, ‘डिस्टेण्ट नेवर : ए टेल ऑफ द सब कॉनण्टीनेण्ट’, ‘इण्डिया आफ्टर नेहरू’, ‘वाल एट वाघा, इण्डिया पाकिस्तान रिलेशनशिप’, ‘इण्डिया हाउस’, ‘स्कूप’ ‘द डे लुक्स ओल्ड’ जैसी कई किताबें लिखी थीं. सन् 1985 से उनके द्वारा लिखे गये सिण्डिकेट कॉलम विश्व के अस्सी से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

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