जापानियों को अंग्रेजी बोलना सिखाएगा रोबोट, 500 स्कूलों में शुरू हुई योजना

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टोकियो: जापान की सरकार बच्चों में अंग्रेजी बोलने के कौशल का विकास करने के लिए उनकी कक्षाओं में अंग्रेजी बोलने वाले आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) रोबोट को शामिल करने का विचार कर रही है. इस पहल की प्रभावोत्पादकता का परीक्षण करने के लिए जापान के शिक्षामंत्री अप्रैल 2019 में पथप्रदर्शक कार्यक्रम शुरू करेंगे. जापान के पब्लिक ब्राडकास्टर एनएचके ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरंभ में देशभर के 500 स्कूलों में इस योजना की शुरुआत की जाएगी और दो साल में इसे पूरी तरह अमल में लाने का लक्ष्य रखा गया है.

टोक्यो में 2020 में आयोजित होने वाले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के दौरान पर्यटकों की तादाद में बढ़ोतरी होने से पहले जापान ने अंग्रेजी दक्षता बढ़ाने की योजना बनाई है. ईएफ इंग्लिश प्रोफिशिएंशी इंडेक्स 2017 में शामिल 80 देशों में जापान 37वें पायदान पर है.

विश्व में रोबोट के जरिये की गई पहली सर्जरी, भारतीय मूल के डॉक्टर ने की अगुवाई
भारतीय मूल के एक सर्जन की अगुवाई में विश्व में रोबोट के जरिये पहली सर्जरी की गई. इसमें एक मरीज की गर्दन से दुर्लभ किस्म के ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला गया. कॉर्डोमा कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार है जो खोपड़ी और रीढ़ की हड्डी में होता है. कॉर्डोमा का ट्यूमर बहुत धीरे- धीरे गंभीर रूप अख्तियार करता है और कई वर्षों तक इसका कोई लक्षण देखने को नहीं मिलता. अमेरिका के 27 वर्षीय नोआ पर्निकॉफ 2016 में एक कार हादसे में जख्मी हो गए थे. मामूली चोट से उबरने के बाद उनके गर्दन में काफी दर्द होने लगा था.इसके बाद एक्सरे कराया गया, जिसमें उसके गर्दन में चिंतनीय क्षति का पता चला.

ये जख्म दुर्घटना से संबंधित नहीं थे और उन्हें लगी चोट की तुलना में बहुत अधिक चिंता पैदा करने वाले थे. इसके बाद उस स्थान की बॉयोप्सी की गयी.इसमें व्यक्ति के कॉर्डोमा से पीड़ित होने की बात निकलकर सामने आई. पर्निकॉफ ने कहा, ‘‘मैं बहुत खुशनसीब हूं कि उन्होंने बहुत पहले इसका पता लगा लिया.

कॉर्डोमा के इलाज के लिए सर्जरी सबसे उपयुक्त विकल्प 
बहुत से लोगों में इसका पता जल्द नहीं लग पाता है और इस कारण शीघ्र उपचार भी मुमकिन नहीं हो पाता है.’’ कॉर्डोमा के इलाज के लिए सर्जरी सबसे उपयुक्त विकल्प होता है लेकिन पर्निकॉफ के मामले में यह बहुत मुश्किल था.ऐसे में उनके पास प्रोटोन थेरिपी का दूसरा विकल्प सामने था. कॉर्डोमा काफी दुर्लभ है.हर साल दस लाख लोगों में कोई एक इससे प्रभावित होता है.पर्निकॉफ के मामले में कॉर्डोमा सी 2 कशेरुका में था.यह और भी दुर्लभ है और इसका उपचार चुनौतीपूर्ण होता है.

पिछले साल अगस्त में पर्निकॉफ की रोबोट के जरिये सर्जरी हुई
अमेरिका के पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के अस्पताल में पिछले साल अगस्त में पर्निकॉफ की रोबोट के जरिये सर्जरी हुई.रोबोट का इस्तेमाल तीन चरणों में की गयी सर्जरी के दूसरे हिस्से में किया गया. सहायक प्रोफेसर नील मल्होत्रा की अगुवाई वाली टीम ने यह सर्जरी की. पर्निकॉफ की सर्जरी तीन चरणों में हुई.

पहले दौर में न्यूरोसर्जन ने मरीज के गर्दन के पिछले हिस्से में ट्यूमर के पास रीढ़ की हड्डी को काट दिया ताकि दूसरे चरण में ट्यूमर को मुंह से निकाला जा सके. पहले चरण की सफलता के बाद सर्जिकल रोबोट के इस्तेमाल के जरिये डॉक्टरों की टीम ने उसके गर्दन से मुंह तक के हिस्से को साफ किया ताकि मल्होत्रा ट्यूमर और रीढ़ की हड्डी के हिस्से को निकाल सकें. अंतिम चरण में टीम ने पर्निकॉफ की रीढ़ की हड्डी को उसके पूर्व के स्थान पर फिट किया. सर्जरी के नौ माह बाद पर्निकॉफ काम पर लौट चुके हैं.

ऑपरेशन करने में सक्षम ये है दुनिया का सबसे छोटा सर्जिकल रोबोट ‘वर्सियस’
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने शल्य चिकित्सा करने में सक्षम दुनिया के सबसे छोटे रोबोट को विकसित करने में सफलता हासिल की है. ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह सर्जिकल रोबोट रोजाना दसियों हजार मरीजों का ऑपरेशन कर सकता है.

100 वैज्ञानिकों, इंजीनियरों की एक टीम की मेहनत
समाचार पत्र ‘गार्जियन’ के मुताबिक, करीब 100 वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों की एक टीम ने मोबाइल फोन व अंतरिक्ष के लिए विकसित की गई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर इस रोबोटिक आर्म का निर्माण किया है, जिसे एक छेद के जरिए सर्जरी करने के लिए विकसित किया गया है.

रोबोट का नाम ‘वर्सियस’
वैज्ञानिकों ने इस सर्जिकल रोबोट का नाम ‘वर्सियस’ दिया है. हूबहू मनुष्यों के बाजू की तरह दिखने वाला यह सर्जिकल रोबोट लैप्रोस्कोपिक विधि से की जाने वाली विभिन्न तरह की सर्जरी कर सकता है, जिसमें हॉर्निया का ऑपरेशन, कोलोरेक्टल ऑपरेशन, प्रोस्टेट ग्रंथि के अलावा नाक, कान एवं गले का ऑपरेशन भी शामिल है.

शल्य चिकित्सा
इस तरह की सर्जरी में पुरानी शल्य चिकित्सा विधि की बजाय सिर्फ एक चीरा लगाया जाता है. कैंब्रिज मेडिकल रोबोटिक्स के अनुसार, इस रोबोट का नियंत्रण शल्य चिकित्सक 3 डी स्क्रीन के जरिए कर सकते हैं.

 

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