राजस्थान के इस शख्स के पास है 30 हजार अलग-अलग माचिस का कलेक्शन, बनाया रिकॉर्ड

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सादुलपुर/ नवीन जांगिड़: जरूरी नहीं दोस्ती किसी इंसान से ही हो. कोई प्रकृति से, तो कोई जीव-जंतुओं से तो कोई अपने शौक से दोस्ती कर लेता है. शौक इंसान को उसके अंदर-बाहर के दु:खों से न केवल कुछ पल के लिए दूर ले जाता है, बल्कि उसके व्यक्तित्व को निखारने में भी सहयोग करता है. शौक कोई भी हो, कैसा भी हो यदि शौक रखने वाले को या किसी दूसरे का नुकसान नहीं पहुंचा रहा हो, तो अच्छा ही होगा और यदि किसी वस्तु विशेष के संग्रह का शौक हो जाए, तो सोने पर सुहागा समझिए. निर्जीव वस्तुओं से दोस्ती की ऐसी ही एक मिसाल है शहर के शीतला बाजार में रहने वाले श्यामसुंदर अग्रवाल. जिनको माचिस से ऐसी दोस्ती हुई है कि इनके संग्रह के लिए लगभग एक लाख रूपये से भी अधिक खर्च कर चुके हैं. आज अग्रवाल के संग्रह में लगभग तीस हजार से भी अधिक माचिस का संग्रह है. जो संभवत: राजस्थान में किसी के पास नहीं है. अग्रवाल ने वर्षों की मेहनत के बाद अपना रहस्य सबसे पहले zee मिडिया को बताया है. अग्रवाल का कहना है कि उनका लक्ष्य पूरा होने के बाद ही सार्वजनिक किया है. वर्तमान में लोग अग्रवाल को माचिस मैन के नाम से पुकारते हैं.

खेल बना जुनून
अग्रवाल का कहना है कि बचपन में स्कूल से आने के बाद माचिस की ताश बनाकर दोस्तों के साथ खेलते थे तथा यहीं से ऐसा जुनून सवार हुआ कि उन्होंने माचिस का संग्रह करना शुरू कर दिया. लगभग ३८ साल में उन्होंने ३० हजार माचिसों का संग्रहण किया है. इसके लिए अग्रवाल को कोहिनूर वर्ल्ड बुक की ओर से पुरस्कृत ही नहीं किया गया बल्कि अग्रवाल का नाम कोहिनूर वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है. अग्रवाल का कहना है कि उनका लक्ष्य गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज करवाना है.

ये हैं संग्रह
अग्रवाल के पास महाराजाओं, स्वतंत्रता सैनानियों, क्रिकेट खिलाडिय़ों, टेनिस फुटबॉल, राजनेताओं, महापुरूषों, फिल्म अभिनेताओं, फूल-पौधे, देवी-देवताओं, राष्ट्रध्वज सहित लोहे की माचिस, चांदी की माचिस, वॉटर प्रूफ माचिस, एक फीट की माचिस, एक इंच की माचिस, प्लास्टिक माचिस सहित विश्व के सभी देशों की माचिसों एवं वल्र्ड के हॉटल्स के नाम की माचिसों सहित हजारों माचिस का संग्रह है. अग्रवाल अपने घर के बने कमरे को एक संग्रहालय का रूप दे रखा है.

अब तो परिजन भी करते हैं सहयोग
अग्रवाल के इस शौक को पूरा करने के लिए परिवारजनों सहित मित्र शहनाज अहमद एवं प्रवीण सोनी ने भी भूमिका निभाई है. इसके अलावा इनके पुत्र कमल ने पूरा साथ दिया है. नया माचिस का कलेक्शन खरीदने के लिए कई गुना कीमत देकर भी खरीदा है एवं जहां भी घूमने जाते हैं, उनका पहला लक्ष्य माचिस के संग्र्रह को ढूंढना होता है. इसके अलावा शहर के प्रवासी लोगों एवं विदेश में रहने वाले लोगों से लगातार संपर्क में रहकर अपना लक्ष्य पूरा किया है.

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